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108 एंबुलेंस सर्विस चलाने वाली कंपनी ब्लैकलिस्टेड, स्वास्थ्य मंत्री को नहीं थी जानकारी, अब दिया जांच कर कार्रवाई का आदेश

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Kumar Gaurav
Ranchi, 30 November:
एंबुलेंस सर्विस 108 राज्यवासियों के लिए एक सौगात के तौर पर आया है. अपातकाल की स्थिति में आप कहीं से भी 108 नंबर डायल कर एंबुलेंस को अपने तक बुला सकते हैं. पर इसके लांचिंग के बाद से ही इससे संबंधित कई तरह के मामले सामने आ रहे हैं. जिनमें से एक मामला यह है कि दूसरों के ईलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने वाली 108 एंबूलेंस सर्विस का संचालन करने का जिम्मा सरकार ने जिस कंपनी को दिया है वो एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी है.

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स्वास्थ्य मंत्री ने दिये हैं जांच के आदेश

स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी  से इस संदर्भ में बात करने पर पता चला कि उन्हें इस मामले की पहले कोई जानकारी नहीं थी. किसी माध्यम से जब उन्हें पता चला कि यह एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी है तो उन्होंने अपने विभाग के अवर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इसके जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि अगर मामला सही पाया गया तो कार्रवाई भी की जाएगी. इस मामले में बात करने पर वो कहते हैं कि हमारे विभाग का काम तो है पर इसको एनआरएचएम ने डील किया है.

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राजस्थान में भाजपा सरकार ने ही किया था ब्लैकलिस्टेड यहां उसी ने दिया जिम्मा

जिस कंपनी को इसका काम दिया गया है उसका नाम जिकित्जा हेल्थकेयर है ये कंपनी पहले राजस्थान में एंबूलेंस सेवा का काम देखती थी. इसके खिलाफ वहां अवैध ढंग से पैसे बनाने का आरोप है. वहां भी इस कंपनी को काम एनआरएचएम ने ही आवांटित किया था. झारखंड में भी एनआरएचएम ने ही इसे काम आवांटित किया है. इसके टेंडर प्रकिया में तीन कंपनियों ने भाग लिया था. इनमें से अन्य दो हैदराबाद की कंपनी पिरामल और एक सीवीके नाम की एजेंसी थी.

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बंधू तिर्की कर चुके हैं विरोध

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इस मामले को लेकर जेवीएम के महासचिव बंधु तिर्की राजस्थान सरकार द्वारा ब्लैकलिस्टेड कंपनी को एंबूलेंस संचालन का जिम्मा दिए जाने को लेकर पहले ही आपत्ति दर्ज करा चुके हैं. मिडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि वह ब्लैकलिस्टेड कंपनी से एंबुलेंस संचालन करवाने की सरकार की मंशा को वह पूरा नहीं होने देगें.

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झारखंड में मुखौटा कंपनियों के खिलाफ आवाज उठाने का सीएस ने दिया है आश्वासन

नौ नवंबर को मुख्य सचिव ने शैल कंपनियों के खिलाफ सभी डीसी और एसपी को खत लिखकर शैल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए थे. उन्होंने कहा था कि झारखंड में मुखौटा कंपनियों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए इसके बावजूद एक राज्य द्वारा काली सूची में डाली गई कंपनी को इतना बड़ा जिम्मा कैसे दे सकती है. जिस कंपनी के 1200 करोडं रुपये ईडी ने जब्त किए हैं.

दो साल पहले हो गई थी डील

कंपनी को टेंडर दिए जाने के बारे में जब पूछा गया तो पता चला कि जिकित्जा को एंबुलेंस संचालन से संबिधित डील दो साल पहले ही हो गई थी. पर मामला यह है कि जिस कंपनी से डील हुई थी वो तो अब ब्लैक्लिस्टेड सूची में है. इसकी जानकारी होने के बावजूद ये जिकित्जा हेल्थकेयर लिमिटेड को एनआरएचएम के द्वारा काम दिया जाना पूरे मामले को शक के घेरे में डाल देती है.

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