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107 दिनों से है अचेत, लेकिन आंखों में अब भी दिखती है जीने की चाह

इलाज के लिए घर की मुर्गी, बकरी, बैल, धान, खेत तक बेच चुके हैं परिजन

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Pravin Kumar

Ranchi : क्या उसे इंसाफ बस इसलिए नहीं मिल रहा, क्योंकि वो एक पिछड़े इलाके से आती है. या फिर वो गरीब है इसलिए. क्या उसकी तरफ मदद के हाथ नहीं बढ़ने चाहिए, जिसे चार दरिंदों ने अपनी हवस मिटाने के लिए नोचा-खरोंचा. जब उसने मना किया तो, उसे इतना पीटा कि वो मौत की दहलीज पर आकर खड़ी है. सच मानिएगा उन दरिंदों ने बेचारी का चेहरा तक कुचल दिया. जरा रिम्स के मेडिसीन आइसीयू आकर उसे एक बार गौर से देखें, अगर आंखों में पानी ना आ जाये, तो कहिएगा. बात हो रही है लातेहार थाना अंतर्गत लूटी गांव की उस अबला की जिसे अपने जिस्म नोचे जाने का विरोध करने की यह सजा मिली है. हालांकि मामले में तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. एक फरार है. लेकिन पीड़िता की हालत इतनी खऱाब है, कि उसे वाकई मदद की दरकार है. उसे यूं छोड़ना इंसानियत के चेहरा पर तमाचे से कम नहीं. सरकारी मदद के नाम पर उसे बस लातेहार से रांची और रांची से लातेहार का सफर नसीब है.

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कभी खेत और खलिहानों में बैखौफ होकर काम किया करती थी. सबसे हंसकर मिलती थी और हमेशा सबकी मदद के लिए तैयार रहा करती थी. लेकिन उसे क्या पता था कि एक दिन उसकी यही हंसी कुछ लोग छीन लेंगे और उसे मरन्नासन तक पहुंचा देंगे. दरअसल 107 दिनों से सुनीता बिस्तर पर पड़ी है और लातेहार के सदर अस्पताल में इलाजरत थी. अब पीड़िता को रिम्स लाया गया है और एक बार फिर से उसकी इलाज शुरू हुआ है.

लातेहार के लूटी गांव की सुनिता देवी (काल्पनिक नाम) के साथ 23 जनवरी को सामूहिक दुष्कर्म हुआ. तीनों आरोपियों ने सुनीता को चोट भी पहुंचायी थी. उसके बाद से ही सुनीता जिंदगी और मौत से लड़ रही है. न्यूज विंग से इस खबर को बोल नहीं पाती, बस उसकी डबडबायी और पथरायी आंखें पूछती हैं – कब मिलेगा न्याय ? शीर्षक से चलाया था. इस खबर का असर भी हुआ है.

दरअसल दुष्कर्म की घटना के बाद सुनिता को लातेहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसके बाद बेहतर उपचार के लिए राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स रेफर कर दिया गया. 26 जनवरी 2019 से 27 मार्च तक रिम्स में उपचार किया गया और बिना स्वस्थ हुए ही 27 मार्च को रिम्स से डिसचार्ज भी कर दिया गया.

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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की पहल

साथ ही परिजनों को कहा गया की अब आप लोग इसे घर में ही रखो. जब रिम्स से वापस भेजा गया था, तब भी सुनीता अचेत अवस्था में ही बिस्तर पर पड़ी थी. परिजनों ने दो दिनों तक सुनीता को घर में रखा. इसके बाद फिर अपनी साम्थर्य के अनुसार स्थानीय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. घटना और इलाज की दयनीय अवस्था देख कर मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पहल किया.

मीडिया में भी खबर प्रकाशित हुई तब जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और सुनिता को 8 मई को रिम्स भेजा. हालांकि परिजनों ने अपने स्तर पर भी सुनीता का इलाज कराया और इसके लिए घर की मुर्गी, बकरी,बैल, धान और  खेत तक बेच चुके हैं. लेकिन फिर भी कोई फायदा नहीं हुआ.

जहां मेडिसिन आईसीयू फिर से इलाज शुरू हुआ है. 107 दिनों में सुनिता का वजन 56 किलो से घटकर मात्र 18-20 किलो रह गया है. सुनीता बोल नहीं सकती,लेकिन उसकी आंखों में जीने की लालसा दिखती है.

कब की है घटना

लातेहार जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर पर लूटी गांव है. 23 जनवरी के दिन गांव की महिला सुनिता (काल्पनिक नाम ) एक किलोमीटर दूर कुंदरी गांव में लगने वाले साप्ताहिक हाट से घर के लिए खरीदारी कर लौट रही थी. बुधवार का दिन था और उसी दिन हाट भी लगती थी. सुनीता अकेली थी और सामान लेकर वो जल्दी में बढ़े जा रही थी.

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इसके पीछे का कारण यहां डॉक्टरों का वेतन पहले से मौजूद मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी कम था. संसाधनों की कमी और निजी कारण बताकर डॉक्टर नये मेडिकल कॉलेजों में सेवा देने से पीछे हट रहे हैं.

लेकिन तभी उसे सामने से आ रहे तीन लोगों ने रोका. सुनीता कुछ समझ पाती उससे पहले ही उन दरिंदो ने उसे घेर लिया और उसका अस्मत लूट ली. इतने से भी मन नहीं भरा तो सुनीता को तीनों ने दमभर पीटा और चेहरे पर भी वार किया.

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क्या हुई अब तक कार्रवाई

लातेहार सदर थाना में इस मामले पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मुकेश ठाकुर एवं एक अन्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. नामजद तीन अभियुक्तों में से फिलहाल एक आरोपी फरार है. सरकार की ओर से पीड़िता और उसके आश्रितों को किसी तरह की सरकारी सहायता अभी तक उपलब्ध नहीं करायी गयी है.

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क्या कहते हैं परिजन

पीड़िता के जेठ मंगल मिंज कहते है. इलाज कराने के क्रम में मैं और मेरा भाई काम छोड़ चुके हैं. घर की आर्थिक स्थिती भी खराब हो गई है. पीड़िता के पति भी दिहाड़ी मजदूरी का काम गुजरात में करता था. साथ ही कहा कि मेरा घर पूरी तरह से बर्बाद हो गया है. भाई अपनी पत्नी के इलाज के लिए घर की मुर्गी, बकरी,बैल, धान के अलावा खेत तक बेच चुका है.

लेकिन अब तक सरकार की ओर से इलाज में कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है. अब तक तीन लाख 80 हजार रूपये से ज्यादा रकम इलाज के नाम पर खर्च हो चुके हैं. हमलोग अपना काम छोड़कर इस उम्मीद में अस्पताल में टिके हुए हैं कि वह ठीक होकर जल्दी घर आएगी.

पीड़िता के दो बच्चे हैं. एक बेटा लूटी के सरकारी स्कूल में छठी क्लास में पढ़ता है. छोटी बेटी  भी उसी स्कूल में कक्षा दो में पढ़ती है.  इतना कहते ही मंगल मिंज फुट-फुट कर बच्चे की तरह रोने लगते है.

राज्य महिला आयोग को मामले की जानकारी नहीं

जब इस बारे में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण ने पूछा गया तो उन्होंने कहा कि  उन्हें मामले की जानकारी नहीं है. साथ ही कहा कि मेरे पास मामला पहुंचते ही संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई की जाएगी. मेरे पास कोई भी मामला लंबित नहीं रहता. तुरंत कार्रवाई की जाती है.

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