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प्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम की 100वीं जयंती, गुगल ने डूडल बनाकर किया याद

NewsWing Desk: पंजाब की सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक रहीं अमृता प्रीतम को उनकी 100वीं जन्मतिथि पर याद किया जा रहा है. विश्व के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने डूडल बनाकर मशहूर भारतीय पंजाबी कवि अमृता प्रीतम को उनके 100वें जन्मदिन पर याद किया है.

पंजाब (भारत) के गुजराँवाला जिले में पैदा हुईं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है.

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कई सम्मानों से अमृता प्रीतम को नवाजा गया

कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित प्रीतम ने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं है. जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ भी शामिल है. साल 1980-81 में उन्हें ‘कागज और कैनवास’ कविता संकलन के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

अमृता प्रीतम की कई किताबें इतनी मशहूर हुईं कि उनका अनुवाद दूसरी भाषाओं में भी किया गया. अपने अंतिम दिनों में अमृता प्रीतम को भारत का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्मविभूषण भी प्राप्त हुआ. उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से पहले ही अलंकृत किया जा चुका था.

अमृता प्रीतम का बचपन लाहौर में बीता. उनकी शिक्षा भी वहीं हुई. बहुत ही कम उम्र से उन्होंने लिखना शुरू किया. उनके प्रकाशित पचास से अधिक पुस्तकें, कविता, कहानी और निबंध जैसी महत्त्वपूर्ण रचनाएं अनेक देशी विदेशी भाषाओं में अनुवादित की गयी है.

पंजाब की पहली कवयित्री मानी जानेवाली अमृता प्रीतम को पंजाबी कविता ‘अज्ज आखां वारिस शाह नूं’ से काफी शोहरत हासिल हुई. इस कविता में भारत विभाजन के समय पंजाब में हुई भयानक घटनाओं के दुखांत का जिक्र है.

इस कविता को भारत के साथ पाकिस्तान में खूब सराहा गया. कहा जाता है कि कविता इतनी मार्मिक थी कि लोग इसे अपने जेब में रखा करते और दिन भर में कई बार पढ़ा करते.

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