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हजारीबाग में बिक गयी 1000 एकड़ वन भूमि! हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर

Vineet Upadhyay

Ranchi : हजारीबाग जिले के कैनरी हिल्स, कटकमसांडी, बड़कागांव समेत अन्य इलाकों की वन्य भूमि के कथित तौर पर बिल्डरों और अन्य लोगों के नाम पर निबन्धन और जमाबन्दी का मामला अदालत की दहलीज़ तक पहुंच चुका है. रांची के रहनेवाले शिव शंकर उरांव ने वर्ष 2009 से 2013 तक उक्त वन भूमि का निबंधन व जमाबंदी किये जाने के खिलाफ झारखंड हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए एक जनहित याचिका दायर की है.

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वन भूमि पर मकान औऱ मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का हो चुका है निर्माण

याचिका में कहा गया है कि हजारीबाग जिले की लगभग 1000 एकड़ वन भूमि प्राइवेट लोगों को अवैध तरीके से बेची गयी है और जिन लोगों ने वन भूमि की जमाबंदी करायी है उनमें वकील, अफसर, पॉलीटिशियन समेत कई लोग शामिल हैं. उक्त जमीन पर घर भी बन गये हैं और मल्टी स्टोरेज बिल्डिंग का निर्माण सभी नियमों को ताक पर रख कर किया जा रहा है. यह पूरी जालसाजी वन क्षेत्र को गैर वन क्षेत्र बता कर की गयी है, जिसमें सर्किल ऑफिसर और इलाके के डीएफओ की भूमिका संदिग्ध है.

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2009 से 2013 तक चलता रहा खेल

प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार के मुताबिक वन भूमि को गैर वन भूमि बता कर धड़ल्ले से बेचने का यह सिलसिला 2009 से वर्ष 2013 तक चलता रहा. जनहित याचिका में वन भूमि कैसे बिकी इसकी जांच सीबीआइ से कराने और वनों के संरक्षण की मांग की गयी है. अनुमान के मुताबिक यह पूरा घोटाला हज़ारों करोड़ रुपये का है.

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