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5 सालों में 100 करोड़ से अधिक हो गये खर्च, पाकुड़ की 17 पंचायतों को नसीब नहीं हुआ एक बूंद भी पानी

Ranchi : जल जीवन मिशन के तहत राज्य के हर घर में पेयजल की सुविधा मुहैया कराने की मुहिम झारखंड में भी जारी है. पाकुड़ में भी लिट्टीपाड़ा वृहद् जलापूर्ति योजना 2017 में शुरू हुई. दो सालों के भीतर ही इसके जरिये 17 पंचायतों के हर गांव में नल से जल की सुविधा दिये जाने का लक्ष्य था. ऐसा होने पर 215 करोड़ की लागत से लगभग 300 घरों को इसका लाभ मिलता. पर पेयजल विभाग इस टार्गेट को समय पर पूरा करने में पीछे ही रह गया. 2020 की अवधि तय की गयी. यह भी पूरी हो गयी. अब 2021 बीतने में 2 माह से भी कम समय शेष है. 217 करोड़ में से आधे से अधिक पैसे खर्च भी हो गये. अब विभाग अगले साल की गर्मियों तक योजना का सोलहों आना काम पूरा करने की गारंटी दे रहा, पर लक्षण अब भी ठीक नहीं लगते.

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बिजली के आसरे बैठा है विभाग

पेयजल विभाग के इंजीनियर राहुल श्रीवास्तव कहते हैं कि अगले साल मई-जून तक लिट्टीपाड़ा जलापूर्ति योजना को पूरा कर लिये जाने की उम्मीद है. लिट्टीपाड़ा प्रखंड को 6 जोन में बांटा गया है. जोन 4, 5 एवं 6 में तकरीबन सारा काम पूरा हुए लगभग एक साल हो चुके हैं. 750 केवीए के ट्रांसफर्मर की जरूरत है. बिजली विभाग इसके लिये प्रयास कर रहा है. बिजली सुविधा मिलने और जरुरी टेस्टिंग के बाद अगले 4-5 महीने के भीतर 10 हजार लोगों को पानी का लाभ मिलना शुरू हो जायेगा. जोन 1,2 और 3 में जो काम बाकी हैं, उसके लिये संबंधित पार्टी को निर्देश दिया जा चुका है. सभी जोन का काम पूरा होने पर 20 हजार लोगों को घर बैठे पानी मिल सकेगा.

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पानी के लिये जारी है जद्दोजहदः विधायक

लिट्टीपाड़ा विधायक दिनेश विलियम्स मरांडी कहते हैं कि लिट्टीपाड़ा में बहुसंख्यक पहाड़िया, और अन्य आदिम जनजातियों की बड़ी संख्या है. पानी के नाम पर सुबह से शाम तक जद्दोजहद जारी है. जलापूर्ति योजना के नाम पर जमीन अधिग्रहण कर लिया गया. रघुवर सरकार में लाठी के बल पर स्थानीय प्रशासन ने लोगों से जमीन छीनी. इसके अलावे पीडब्लूडी और आरईओ ने संगठित तरीके से मिलकर सड़कों पर ही पाईपालाइन कई जगहों पर बिछा दिया. खासकर साहिबगंज-गोविंदपुर रोड पर. कल को जब एनएच प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ेगा तो पाइप को हटाने और फिर से उसे बिछाये जाने के नाम पर फिर से बिल बनेगा, सरकारी खजाने को चोट पहुंचायी जायेगी.

दिल्ली की जिस कंपनी को यह काम मिला है, उसे ब्लैकलिस्ट किया जाना जरूरी है. साथ ही ऱघुवर सरकार के समय जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी इस योजना में थी, सबों के भूमिका की जांच जरूरी है. विधानसभा में 2020 में उन्होंने लिट्टीपाड़ा जलापूर्ति का मसला सरकार के सामने रखा भी था. अब बगैर अधिकारियों की भूमिका, कराये गये काम की क्वालिटी की जांच के वे इस योजना से बहुत उत्साहित नहीं हैं.

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Nayika

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