Uncategorized

10 साल पहले लगा था क्रशर, आज खेतों से दूर होने की आ गई नौबत

Pravin Kumar

Ranchi : अब गांव के खेतों में पहले की तरह फसल नहीं होती है, साथ ही अपने मवेशियों के लिए चारा भी जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों की परेशानी यहीं खत्म नही होती अब तो ग्रामीणों का सांस फूलने की समस्या और टीबी की बीमारी का शिकार भी होने लगे हैं. रोगों के उपचार के लिए भागदौड़ दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. गांव के जलस्रोत सूखने लगे हैं, घरों की दीवार पर दरार भी पड़ने लगी, हर धमाके के साथ गांव के लोगों को लगता है जैसे भूकांप आ गया हो. खदान में ब्लास्ट किए जाने पर पत्थर के टुकड़े घरों की छत पर बेमौसम बरसात की तरह बरसने लगते हैं. क्रशर मालिकों को ब्लास्ट न करने के लिए कहने पर आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता है. ये किसी ट्रैजिडी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि राजधानी रांची से सटे गांवों में रहने वाले लोगों की व्यथा है.

इसे भी पढ़ें- शिक्षा विभाग टैब घोटाला : एक साल बीतने को है, जैप आईटी नहीं सुलझा सका एचपी और सरकार के बीच की उलझन, इसी की आड़ में अब बच रही सरकार (4)

ram janam hospital
Catalyst IAS

hh

The Royal’s
Sanjeevani
Pitambara
Pushpanjali

ग्रामीण कई समस्याओं से परेशान

दिन के 1 बजे होगे. गांव में सन्नाटा था तभी इमली के पेड़ के पास कुछ लोग बैठे मिले. संवाददाता ने अपना परिचय दिया तो धीरे-घीरे कई दर्जन लोग आ गये और फिर अपनी व्यथा-कथा का आरंभ किया. यह रांची खूंटी मुख्य सड़क पर स्थित हारदाग, टंगराटोली और दुंदु पिपराटोली गांव का दर्द है, जो पिछले 2 सालों से माइनिंग के कारण कई समस्याओं से घिर गया है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि करीब 10 साल पहले रोजगार मिलने की उम्मीद में गांव के लोगों ने पत्थर खदान खोलने के लिए अपनी रैयती जमीन पर रास्ता बनाया जिससे गाड़िया चल सकें और लोगो को रोजगार मिल सके. लेकिन रोजगार तो दूर की बात हो गई, अब तो अपने घर में रहना भी मुश्किल होता जा रहा है. गांव में पत्थर खदान खुलने से कई लोगों को अपने हाथ पैर भी गंवाने पड़े. बुजुर्ग ने बताया कि मैं भी खदान में काम करता था. ब्लास्ट से मेरा पैर टूट गया था. क्रशर मालिक ने रिम्स में इलाज कराया. जब अस्पातल से घर आए तो इलाज के सभी कागजात भी ले लिये. आज भी मेरा पैर ठीक से नही जुटा है बैसाखी के सहारे बुढ़ापा काट रहा हू. अब तो क्रशर में गांव के लोगों को काम नहीं दिया जाता है.

लोगों को झांसा देकर जमीन ली गई

गांव के युवा अनूप कहते हैं 10 साल पहले कुछ लोग गांव आए, कुछ पैसे दिये और काम देने का लालच दिया और उन्होंने अपनी जमीन दे दी. पहले एक क्रशर लगा फिर दूसरा और तीसरा लगा. आज गांव के लोगों को पेयजल के सकट का भी समाना करना पड़ रहा है. अजीविका का मुख्य स्रोत कृषि थी, जिसमें अब उपज भी घट गयी है. गांव के लोगो को अब रोजगार के लिए रांची और हटिया जाना पड़ रहा है. वर्तमान समय में  गांव के 10 लोग टीबी की बीमारी का शिकार हो गए हैं, जिनमें बच्चें भी शामिल हैं.

इसे भी पढ़ें- ट्रेनों के लेट से हलकान हैं यात्री, रेलवे विभाग का वही राग- जल्द होगा सब ठीक  

रर

ग्रामसभा के आवेदन पर भी नहीं हुई कार्रवाई

युवा अनूप कहते हैं कि गांव में माइनिंग के कारण हो रही परेशनी और हादसों को देखते हुए ग्रामसभा में बैठक की गई. बैठक कर माइनिंग कार्य रोकने के लिए जनजातीय परामर्शदातृ परिषद के सदस्य ,सचिव खनन विभाग झारखंड सरकार,सचिव झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,जिला खनन पदाधिकारी रांची,अचंल अधिकारी नामकोम, पुलिस उपाधीक्षक हटिया को आवेदन 17 अप्रैल 2018 को दिया गया था, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने पर पुन: ग्रामसभा की बैठक कर ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि हम वो रास्ता जो ग्रामीणों की निजी जमीन पर है उसे काट देंगे. ग्रामीण कहते है सरकार के लोगों को आवेदन देने के बाद कभी वह पूछने को नही आए. गांव में सिर्फ टीएससी सदस्य रतन तिर्की आये और गांव की समस्याओं पर नियम सम्मत प्रक्रिया पूरी कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया. किसी भी तरह की सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं होने के कारण मजबूरी में हमलोगों को सड़क को भी काटना पड़ा.

ग्रामसभा की बात नहीं सुनते अधिकारी

गांव के युवा कहते हैं सरकार ग्रामसभा को मजबूत करेगी और ग्रामसभा के माध्यम से गांव का विकास करेगी लेकिन ग्रामसभा की बात तो अधिकारी सुनते ही नहीं है. क्रशर के कारण अब तक गांव के तीन लोगों को विकलांग होना पड़ा है. वहीं पत्थर खदान आबादी और विद्यालय के निकट ही 500 मीटर के दायरे में खुला है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button