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1.70 लाख घरों को रेगुलराइजेशन का इंतजार

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची बन गई है. लेकिन इसकी पहचान आज भी एक हिल स्टेशन के रूप में है. यही वजह है कि लोग यहां आए और बसते चले गए. साथ ही अपने सपनों का आशियाना भी बना लिया. इस दौरान लोगों ने एक गलती कर दी कि बिना नक्शा के घरों का निर्माण करा लिया. अब बिना नक्शा वाले घरों पर निगम का डंडा चला है तो लोगों की नींद खुली है. लेकिन चाहकर भी वे अपना घर रेगुलराइज नहीं करा पा रहे है. चूंकि नगर निगम को सरकार की ओर से ऐसा कोई निर्देश ही नहीं मिला है. जिससे कि वे अपने घरों का रेगुलराइजेशन करा ले. ऐसी स्थिति में लोग डर के साथ रह रहे हैं.

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आवेदन की बढ़ती जा रही संख्या

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अपने सपनों का आशियाना तो लोगों ने बना लिया. लेकिन नगर निगम में प्रापर इंतजाम नहीं होने की वजह से लोगों ने घरों का नक्शा नहीं बनवाया. आज स्थिति यह है कि राजधानी में 1.70 लाख घरों का अपना कोई नक्शा ही नहीं है.

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सख्ती के बाद लोग अपने घरों का नक्शा पास कराकर उसे रेगलुराइज कराने के इच्छुक हैं. और इसके लिए नगर निगम में आवेदन भी जमा करा रहे है. लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा. इस चक्कर में आवेदनों की लिस्ट लंबी होती जा रही है.

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हर साल निगम भेजता है नोटिस

रांची में अवैध इमारतें हैं. इनमें मकान और अपार्टमेंट के अलावा व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं. इन अवैध इमारतों के मालिकों को हर साल रांची नगर निगम की तरफ से नोटिस जारी किया जाता है.

इसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला जाता है. वहीं सुनवाई में नगर निगम को इसके लिए फटकार लगाई जाती है. इसके बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है.

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डिप्टी मेयर ने की थी नियमावली की मांग

डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने दिसंबर 2021 में सीएम सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखा था. साथ ही मांग की गई थी कि पूर्व में बने सभी भवनों का नक्शा रेगुलराइज जल्द करवाया जाए.

उन्होंने कहा था कि रांची वासियों को इस भय के माहौल से निकालने के लिए भवन रेगुलराइजेशन का सरल प्रारूप तैयार करने की आवश्यकता है. जिससे कि शहर के वैसे मकान जो अतिक्रमण में नहीं आते हैं उसे रेगुलराइज किया जा सके.

झारखंड सरकार इस विषय को संज्ञान में लेते हुए जल्द से जल्द पुराने भवनों के लिए नियमावली बनाए. इसके बावजूद आजतक सरकार की ओर से कोई नियमावली नहीं बनाई गई है और न ही कोई निर्देश जारी किया गया है.

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