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हाल-ए-रिम्स : अलग-अलग रंग की चादर योजना फेल, बीमारी तो ठीक हो नहीं रही, बढ़ रहा संक्रमण का खतरा

Saurav Shukla, Ranchi: राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में अलग-अलग रंग के चादर की योजना फेल हो गयी है. मरीज और उनके परिजनों की शिकायतों के बाद रिम्स के बेड में अलग-अलग दिन अलग कलर का चादर बिछाने की योजना बनी. इसके तहत बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से चार रंग की बेडशीट खरीदी गयी. रिम्स प्रबंधन की सोच कि जब हर रोज अलग-अलग कलर की चादर बिछानी पड़ेगी तो बेडशीट बदलने वाले कर्मचारी चाह कर भी कोताही नहीं कर पायेंगे, लेकिन ऐसा हो न सका. यह व्यवस्था सही तरीके से लागू नहीं हो पायी. जनरल वार्डों के चादर सिर्फ फाइलों में ही बदल रहे हैं, हकीकत में नहीं, जबकि डॉक्टरों का साफ कहना है कि एक ही चादर लंबे समय तक बेड में रहने से मरीज को इंफेक्शन होता है.

भर्ती होने से लेकर छुट्टी होने तक मरीज को मिलती है एक ही चादर

अस्पताल में भर्ती मरीज के बेड पर बिछी चादर कब बदली जाएगी यह कोई नहीं जानता. विरोध किया जाने के बाद ही कर्मचारी चादर बदलते हैं. ज्यादातर मामलों में मरीज के भर्ती होने के समय जो बेडशीट बिछाई जाती है वह छुट्टी होने के बाद ही हटायी जाती है. कई बार यही गंदी चादर के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और मरीज की बीमारी ठीक होने के बजाए और बढ़ जाती है.

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किस दिन बिछाना है किस रंग का चादर

रविवार- मरुन

सोमवार- सफेद

मंगलवार- सफेद

बुधवार- हरा

बृहस्पतिवार- हरा

शुक्रवार- नीला

शनिवार- नीला

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कभी मिलता है कंबल, तो कभी घर से लाये कंबल से चलता है काम

इतना ही नहीं मरीजों को ठंड में भी रिम्स में कंबल नहीं मिलता है. कुछ भाग्यशाली मरीज होते हैं, जिनपर प्रबंधन की मेहरबानी होती है और उन्हें भर्ती होने के साथ ही बेडशीट और कंबल मिल जाता है. वरना अधिकांश मरीजों को ठंड की रात भी अपने घर से लाये कंबल से ही काटनी पड़ती है. ऐसी बात नहीं है कि रिम्स में बेडशीट या कंबल की कमी है. प्रबंधन हर साल लाखों रुपए की बेडशीट और कंबल की खरीदारी करता है, लेकिन यह संसाधन या तो इंचार्ज नर्सों के ताले में बंद होता है या फिर कमरे में सड़ रहे होते हैं.

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17 मई को मुख्यमंत्री ने किया था उद्घाटन

रिम्स में अत्याधुनिक मैकेनाइज्ड लांड्री का शुभारंभ मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अधिकारियों के द्वारा की गयी. इसमें कपड़ा धोने, सुखाने, प्रेस करने व वार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेवारी भी संचालित करने वाली कंपनी की है. बावजूद इसके इस सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. लॉन्ड्री के कर्मियों को ना तो कोई समय से कंबल या बेडशीट देता है, न ही धोने के बाद उसे मुस्तैदी से लेता है. परिणाम जो जहां है वहीं बर्बाद हो रहा.

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