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‘सूफी मौजूदा दौर का सर्वाधिक दुरुपयोग किया जाने वाला शब्द’

नासिक: आज के दौर में ‘सूफी’ सर्वाधिक दुरुपयोग किया जाने वाला शब्द बन गया है। यह कहना है भारत में फ्यूजन रॉक बैंड को प्रचलित करने में अग्रणी रहे रॉक बैंड ‘इंडियन ओशन’ के सदस्य राहुल राम का।

उन्होंने नासिक में ‘सुलाफेस्ट 2017’ से इतर आईएएनएस से कहा, “किसी भी संगीत को सूफी संगीत का टैग दे दिया जाता है। मैं यह देखकर काफी हैरान था कि एक बड़ी म्यूजिक कंपनी ने मेरे गैर सूफी गीतों को सूफी एलबम में डाल दिया, जबकि मेरे सूफी गीतों को उसमें शामिल ही नहीं करती। हो सकता है कि अब टैग ही ज्यादा बिकता है।”

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‘इंडियन ओशन’ अपने रॉक बैंड के 28वें वर्ष में है और इसे फिल्मी और गैर फिल्मी दोनों प्रकार के संगीत के लिए जाना जाता है। इस बैंड का पहला हिट एलबम ‘कंदीसा’ 2000 में रिलीज हुआ था, जो उस समय भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला म्यूजिक एलबम था।

बैंड के अन्य सदस्य सुस्मित सेन ने कहा, “हमें इस बात पर गर्व है कि हम शोहरत पाने के लिये मुंबई नहीं गए। अगर आपके पास हुनर है तो आप कहीं भी सफल हो सकते हैं, चाहें आप देश के किसी भी हिस्से में क्यों न हों। बैंड के अन्य सदस्यों में तुहिन चक्रवर्ती, हिमांशु जोशी और अमित किलम शामिल हैं।”

‘कंदीसा’ की आपार सफलता के बाद इस रॉक बैंड को बॉलीवुड से कई प्रस्ताव मिले और इस समूह ने ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘कटियाबाज’, ‘पीपली लाइव’, ‘मसान’, ‘मुंबई कटिंग’ और ‘साइलेंस’ समेत कई फिल्मों के लिए संगीत रचना की।

राम ने कहा, “फिल्मों के लिए संगीत देना इसकी परिस्थितियों और गाने की लंबाई पर निर्भर करती है। इसलिए हम अधिकांशत: अपने एलबम ही बनाते हैं और लाइव शो ही करते हैं। लाइव शो के दौरान जब आप अपने गीतों पर लोगों को नाचते-गाते देखते हैं तो बहुत संतुष्टि मिलती है।”

पारिश्रमिक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “यह गलत धारणा है कि बॉलीवुड संगीत में काफी अधिक पारिश्रमिक मिलता है। हकीकत में बॉलीवुड में कोई भी संगीतकार ज्यादा पैसा नहीं कमाता। लाइव शो कर आप ज्यादा कमा सक ते हैं, लेकिन यह भी सच है कि बॉलीवुड से आपको पहचान मिलती है, जिसके बाद आपको बाहर भी शो मिलते हैं।”

अपनी संगीत शैली को वर्गीकृत करने के सवाल पर उन्होंने कहा, “हम अपने संगीत को कोई नाम नहीं देते, यह केवल संगीत है जो रूह को सुकून प्रदान करता है।”

अपने एलबम ’16/330 खजूर रोड’ (दिल्ली के करोल बाग के पते पर रखा गया नाम, जहां वे 1997 से रियाज करते रहे हैं) को नि:शुल्क ऑनलाइन रिलीज करने को लेकर समूह के एक सदस्य जोशी ने कहा, “एलबम बेचने के दिन अब चले गए, क्योंकि अब सबकुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। इसलिए हमने अपने गाने को लोगों के बीच ऑनलाइन जारी करने का फैसला किया है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो हमें और भी प्रस्ताव मिलेंगे, जिससे हमें भविष्य में फायदा होगा और हम कॉपीराइट और कांट्रैक्ट से संबंधित कई अन्य मुश्किलों से बच जाएंगे।”
(निर्मल अंशु रंजन)

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