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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जज विवाद, 100 वकीलों की अपील पर इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पर रोक लगाने से CJI का इनकार

New Delhi : देश में इन दिनों न्यायपालिका विशेष रुप से चर्चा का विषय है. हालिया दिनों सामने आए प्रकरणों के बीच अब एक और नया विवाद सामने आया है, जिसकी तह में है सुप्रीम कोर्ट में एक जज की नियुक्ति. केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद जस्टिस के.एम. जोसेफ का नाम लौटाने और इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाए जाने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से जुड़े करीब 100 वकीलों ने हस्ताक्षर कर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी कि तुरंत इस मामले पर सुनवाई हो और इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. पूर्व सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह ने इस मामले की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में की लेकिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अदालत ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. मामले में पैरवी करते हुए इंदिरा जय सिंह ने कहा कि उनका मकसद इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को रोकना या टालना नहीं, बल्कि जस्टिस जोसेफ के मामले में केंद्र सरकार के कदम से न्यायपालिका को बांटने की कोशिश से रोकना है.

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जस्टिस जोसेफ को प्रोन्नति देने का यह सही समय नहीं : कानून मंत्रालय 

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इससे पहले कानून मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी में कहा है कि जस्टिस जोसेफ को प्रोन्नति देने का यह सही समय नहीं है. खबर है कि ऑल इंडिया हाई कोर्ट जस्टिस की लिस्ट में जस्टिस जोसेफ का वरिष्ठता क्रम 42वां है. इसके अलावा हाई कोर्ट के अन्य 11 चीफ जस्टिस भी उनसे सीनियरिटी लिस्ट में आगे हैं. गौरतलब है कि इसी साल 10 जनवरी को पांच जजों की कॉलेजियम ने उत्तरखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के.एम. जोसेफ और सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के लिए सिफारिश की थी. कॉलेजियम की सिफारिश पर जब कानून मंत्रालय ने कोई पहल नहीं की तब फिर से कॉलेजियम ने फरवरी के पहले हफ्ते में कानून मंत्रालय को लिखा. इसके बाद कानून मंत्रालय ने प्रक्रिया शुरू की और सिर्फ इंदु मल्होत्रा की फाइल की आईबी जांच पूरी करवाई. केंद्र ने कॉलेजियम को जस्टिस जोसेफ के नाम पर दोबारा विचार करने का अनुरोध करते हुए फाइल फिर से सुप्रीम कोर्ट भेज दी. इसके बाद से ही विवाद की शुरुआत हुई.

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जज विवाद पर सियासत शुरू

बात अब न्यायपालिका तक सीमित नहीं रही. अब इसपर सियासत भी शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने जस्टिस जोसेफ को प्रोन्नति नहीं दिये जाने को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा है कि क्या राज्य, धर्म या उत्तराखंड केस में फैसले की वजह से जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट नहीं लाया जा रहा है? चिदंबरम के वार पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी पलटवार में देर नहीं लगाई. उन्होंने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस को न्यायपालिका की संप्रभुता पर सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से न्यायपालिका के साथ बुरा बर्ताव किया है.

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