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सुधीर त्रिपाठी बने मुख्य सचिव, निधि खरे स्वास्थ्य सचिव बनी और रहाटे को कार्मिक का प्रभार

राजबाला वर्मा के सेवानिवृत होने के बाद राज्य का अगला मुख्य सचिव कौन होगा, इसे लेकर पिछले 10 दिनों से चर्चा चल रही थी. बुधवार की सुबह सरकार ने इस पर अंतिम फैसला ले लिया. एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि सरकार ने आइएएस सुधीर त्रिपाठी को मुख्य सचिव बनाने का फैसला लिया है. इससे संबंधित संचिका पर मुख्यमंत्री ने हस्ताक्षर कर दिया है. सुघीर त्रिपाठी अगले छह माह तक मुख्य सचिव के पद पर रहेंगे क्योंकि छह माह बाद वह सेवा निवृत होनेवाले हैं. इसकेे साथ ही कार्मिक सचिव निधि खरे का भी सरकार ने तबादला करने का फैसला लिया है. उन्हें स्वास्थ्य सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया है. सुधीर त्रिपाठी को मुख्य सचिव बनाने के बाद यह पद रिक्त हो गया है. इसके आलावा गृह सचिव एसकेजी रहाटे को कार्मिक विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

सरकार की सलाहकार बन सकती हैं राजबाला वर्मा

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Ranchi: राजबाला वर्मा के सेवानिवृत होने के बाद राज्य का अगला मुख्य सचिव कौन होगा, इसे लेकर पिछले 10 दिनों से चर्चा चल रही थी. बुधवार की सुबह सरकार ने इस पर अंतिम फैसला ले लिया. एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि सरकार ने आइएएस सुधीर त्रिपाठी को मुख्य सचिव बनाने का फैसला लिया है. इससे संबंधित संचिका पर मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाने से पहले हस्ताक्षर किया. जिसके बाद कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है. सुघीर त्रिपाठी अगले छह माह तक मुख्य सचिव के पद पर रहेंगे क्योंकि छह माह बाद वह सेवा निवृत होनेवाले हैं. इसकेे साथ ही कार्मिक सचिव निधि खरे का भी सरकार ने तबादला करने का फैसला लिया है. उन्हें स्वास्थ्य सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया है. सुधीर त्रिपाठी को मुख्य सचिव बनाने के बाद यह पद रिक्त हो गया है. इसके आलावा गृह सचिव एसकेजी रहाटे को कार्मिक विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

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आज सेवानिवृत होंगी राजबाला, सरकार की सलाहकार बनाये जाने की चर्चा

मुख्य सचिव राजबाला वर्मा बुधवार की शाम सेवानिवृत्त हो जायेंगी. सत्ता शीर्ष में चर्चा है कि राजबाला वर्मा को सरकार मुख्यमंंत्री का मुख्य सलाहकार नियुक्त करेगी. साथ ही उन्हें मंत्री का दर्जा भी दिया जायेगा. राजबाला वर्मा अब तक की सबसे विवादित मुख्य सचिव रही हैं. सरकार के भीतर से और बाहर से भी उनके खिलाफ विरोध की आवाज उठती रही है. सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर उन पर कई आरोप लगे. इन सबके बीच उन्होंने ना सिर्फ अपनी मुख्य सचिव की पारी सफलतापूर्वक खेली, बल्कि अब सरकार के सलाहाकर भी बनेंगी. बुधवार की शाम तक इसकी अधिसूचना जारी किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है.

विवादों वाला रहा राजबाला वर्मा का सफर

राजबाला वर्मा का कार्यकाल विवादों से भरा हुआ रहा. उनके रिटायरमेंट के आखिरी दिनों में भी वो अखबारों की सुर्खियां बनी रहीं. ऐसा बिरले ही देखा जाता है कि किसी अधिकारी की वजह से किसी प्रदेश की विधानसभा ना चले. झारखंड में बीता बजट सत्र पूरे तरीके से सीएस के नाम पर ही भेंट चढ़ गया. सबसे ज्यादा विवाद पशुपालन घोटाला को लेकर हुआ. 1991 में चाईबासा की डीसी राजबाला वर्मा थीं. उसी वक्त संयुक्त बिहार के वक्त चारा घोटाला हुआ था. 1998 में इनके खिलाफ सीबीआई ने माइनर पनिशमेंट के लिए कार्रवाई की अनुशंसा की थी. लेकिन सीबीआई के उस निर्देश का अनुपालन सरकार की तरफ से नहीं किया गया है. राजबाला वर्मा 30 अप्रैल 1990 से 30 दिसंबर 1991 तक चाईबासा में डीसी थी. सीबीआई की तरफ से मामले को लेकर बीते 15 सालों में 23 बार रिमांइडर भेजा, लेकिन फिर भी राजबाला ने चारा घोटाला से जुड़ा अपना पक्ष नहीं रखा. आखिरी बार सरकार की तरफ से पांच फरवरी को सीएस राजबाला वर्मा को शो-कॉज किया गया. 15 जनवरी 2018 को उन्होंने सरकार का जवाब सौंपा. जवाब में उन्होंने कहा है कि कुछ कारणों से वो उस समय ट्रेजरी का निरीक्षण नहीं कर सकीं थी. जवाब दिये हुए चालिस दिनों से ज्यादा गुजर गया है, लेकिन सरकार की तरफ से किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.

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चार साल से पुराने मामले में नहीं होगी कार्रवाई

चंद घंटों की बात है कि झारखंड में सुर्खियों में रहने वाली सीएस राजबाला वर्मा रिटायर होने वाली हैं. लेकिन सरकार की तरफ से राजबाला वर्मा के खिलाफ सीबीआई की अनुशंसा नहीं मानी गयी है. सीबीआई ने चारा घोटाला मामले से जुड़े एक मामले में माइनर पनिशमेंट की अनुशंसा की थी. बताते चलें कि अब अगर इन बचे चंद घंटों में सरकार राजबाला के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो उनके खिलाफ बाद में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो पायेगी. क्योंकि सीएस रैंक के अधिकारी के साथ चार साल से ज्यादा पुराने मामले में कार्रवाई नहीं हो सकती है.

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क्लीन चिट देने की है तैयारी

राजबाला वर्मा को सरकार की तरफ से चारा घोटाला मामले में क्लीन चिट देने की तैयारी है. हालांकि कागजी कार्यवाही अभी तक नहीं हुयी है. अगर सरकार की तरफ से राजबाला वर्मा को क्लीन चिट दे दी जाती है, तो राजबाला वर्मा मामले से साफ तौर पर निकल जायेंगी. वैसे सरकार ने अपनी तरफ से क्लीन चिट देने में काफी देर की. बताते चलें कि राजबाला वर्मा ने सरकार की तरफ से दिये गए शो कॉज का जवाब 15 जनवरी को ही दे दिया गया था. बताया जा रहा है कि उनके रिटायरमेंट का ही इंतजार किया जा रहा था.

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