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सिन्हा को 2-जी घोटाले की जांच से दूर रहने के निर्देश

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक रंजीत सिन्हा को 2-जी स्पैक्ट्रम मामले की जांच में हस्तक्षेप न करने के लिए कहा। न्यायालय ने उन्हें इस मामले की जांच व मुकदमे से दूर रहने को कहा है।

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प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच.एल.दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2-जी मामले की जांच कर रही टीम के शीर्ष अधिकारी अब पूरी जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे।

न्यायालय ने 15 सितंबर को गैर सरकारी संगठन सीपीआईएल को निर्दिष्ट आदेश को दोहराते हुए 2-जी स्पैक्ट्रम जांच में सिन्हा पर हस्तक्षेप के लगे आरोप को ‘विश्वसनीय’ करार दिया।

न्यायालय ने अपने निर्देश में सीपीआईएल को व्हिस्लब्लोअर की पहचान जाहिर करने को कहा था, जिसने सिन्हा के कथित हस्तक्षेप की जानकारी दी थी।

न्यायालय ने हालांकि, इस आदेश को लेकर पूरी वजह नहीं बताई और कहा इससे शीर्ष जांच एजेंसी की छवि धूमिल होगी।

इससे पूर्व दिन में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई के उस अनुरोध पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि वरिष्ठ वकील के.के.वेणुगोपाल आगे 2-जी स्पैक्ट्रम मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।

न्यायालय को सीबीआई के संयुक्त निदेशक अशोक तिवारी की बात भी नागवार गुजरी, जिसमें उन्होंने कहा कि वेणुगोपाल के सहायक वकील गोपाल शंकर नारायण ने उन्हें बताया कि वेणुगोपाल मौजूदा जांच में एजेंसी का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।

न्यायालय को अदालत कक्ष में बड़ी संख्या में सीबीआई अधिकारियों की मौजूदगी पसंद नहीं आई और इसने उनकी मौजूदगी की वजह पूछी।

सिन्हा के वकील विकास सिंह ने कहा कि वह फाइल पर स्पष्टीकरण के लिए न्यायालय का सहयोग कर रहे हैं, तो न्यायमूर्ति दत्तू ने कहा, “हमने उन्हें नहीं बुलाया। अगर हमें किसी तरह के स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी, हम उन्हें बुलाएंगे।”

इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने सभी अधिकारियों से सुनवाई कक्ष से बाहर चले जाने को कहा।

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