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साहेबगंज में गंगा पुल का निर्माण NHAI को सौंपा जाए – मुंडा

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राँची, 03 जनवरी, 2012 – मुख्यमंत्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि साहेबगंज से गंगा नदी के 80 कि॰मी॰ प्रवाह में गंगा पर कोई पुल नहीं होने की वजह से साहेबगंज एवं संताल परगना के कई जिलों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

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साहेबगंज में गंगा पर पुल बनने से भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्रों से राष्ट्रीय उच्च पथ-81 एवं राष्ट्रीय उच्च पथ-31 से बिहार के मनिहारी और पुर्णिया होते हुए सीधा सम्पर्क हो जाएगा जिससे पूरे देश को ही नहीं बल्कि झारखण्ड और बिहार राज्य को संयुक्त रूप से फायदा होगा। बिहार एवं देश के उत्तर पूर्वी क्षेत्रों से सीधा वाणिज्यक सम्पर्क के लिए साहेबगंज में गंगा पुल निर्माण को उन्होंने जरूरी बताते हुए कहा कि झारखण्ड सरकार ने 311 कि॰मी॰ गोबिन्दपुर-साहेबगंज रोड, जो राष्ट्रीय उच्च पथ-2 से साहेबगंज में मिलती है, के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से सहयोग प्राप्त किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को इस बावत पत्र के द्वारा अनुरोध किया है कि चुंकि साहेबगंज का गंगा पुल दो राज्यों से सम्बंधित है इसलिए इस पुल के निर्माण की जिम्मेवारी (NHAI) भारतीय राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण को सौंपी जानी चाहिए जो इस पुल की व्यवहार्यता के सम्बंध में शीघ्र अध्यन करें।
 उन्होंने कहा है कि इस संबंध में विगत 13 सितम्बर 2011 को सचिव, सड़क परिवहन एवं उच्च पथ मंत्रालय, भारत सरकार के साथ बिहार एवं झारखण्ड सम्बंधित प्रतिनिधियों की बैठक हुई है जिसमें यह तय हो चुका है कि झारखण्ड सरकार अपने क्षेत्राधिकार में साहेबगंज गंगा पुल निर्माण के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराएगी वहीं कटिहार-पुर्णिया सेक्सन में भूमि अधिग्रहन का कार्य बिहार सरकार के द्वारा उनकी लागत पर ही किया जाएगा एवं उस रूट को फोर लेन हाईवे के रूप में विकसित करने का कार्य पी॰पी॰पी॰ मोड में किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने पत्र के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री महोदय को अवगत कराया है कि चार महीने बीतने के बावजूद भी (NHAI) भारतीय राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण के द्वारा व्यवहार्यता अध्यन नहीं कराया गया है जिसके कारण इस परियोजना को प्रारम्भ किए जाने में विलम्ब होना स्वाभाविक है। उन्होंने प्रधानमंत्री महोदय से निवेदन किया है कि साहेबगंज गंगा पुल के शीघ्र व्यवहार्यता अध्यन के लिए सड़क परिवहन एवं उच्च पथ मंत्रालय, भारत सरकार एवं (NHAI) भारतीय राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण को निदेशित करने की कृपा की जाए।
 

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