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साहिबगंजः राजमहल की पहाड़ियों में दबे जीवाश्म का अध्ययन करने पहुंची खान मंत्रालय की टीम

News Wing

Sahebganj, 24 September: खान मंत्रालय के भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग का तीन सदस्यीय दल राजमहल पहाड़ियों का अध्ययन करने रविवार को साहिबगंज पहुंचा है. वरिष्ठ भू वैज्ञानिक शशिकांत पवन कुमार और भू वैज्ञानिक सुदीप कुमार सिंह के साथ साहिबगंज कॉलेज के भू वैज्ञानिक प्रध्यापक डॉ रणजीत कुमार सिंह शामिल इस टीम में शामिल हैं. टीम के सदस्यों ने रविवार को महादेवगंज मिर्जाचौकी का दौरा किया. वैज्ञानिक यह सर्वेक्षण कर रहे हैं कि राजमहल पहाड़ियों में कितने अंतराल में ज्वालामुखी फटे हैं.

यहीं मिलता है सबसे प्राचीनतम फॉसिल्स जीवाश्म
इससे पहले यह अध्यनन 1950-1955 में किया गया था. उसके बाद यह पहली बार पूरे संथाल परगना का Geological traverse स्टडी सभी पहाडों का  किया जाएगा. जिले के लगभग सभी पहाड़ियों पर जा कर एक स्टडी रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है. इसके तहत भू हलचल टेक्टॉनिक स्टडी भी किया जाएगा. गौरतलब है कि दुनिया का सबसे प्रचीनतम जीवाश्म फॉसिल्स साहिबगंज के राजमहल पहाड़ियों में मिलता है.

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तारा पहाड़ में पादप जीवाश्म के कई जीवंत उदाहरण मौजूद

साहेबगंज के मंडरो प्रखंड के तारा पहाड़ मे आज भी पादप जीवाश्म के कई जीवंत उदाहरण मौजूद हैं. यहां हजारों साल पहले बड़े-बड़े पेड़ हुआ करते थे, जो आज पत्थर के बन गये हैं. इसपर शोध करने और इन्हें देखने देशभर से भूगर्भशास्त्र के स्टूडेंट्स अक्सर यहां आते रहते हैं.

साहिबगंज कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस खोलने की मांग
राजमहल की पहाड़ियों में फॉसिल्स को सुरक्षित और संरक्षित करने के साथ-साथ शोध और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सालों से प्रयास चल रहे हैं, लेकिन अबतक आशा के अनुरूप काम नहीं हुए. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन अनमोल विश्व धरोहर को बचाने के लिए साहिबगंज कॉलेज में भू विज्ञान का एक सेंटर ऑफ एक्सिलेंस खुलना चाहिए, ताकी प्रकृति के द्वारा दिये गये प्रकृति प्रयोगशाला का उपयोग छात्र, शिक्षक और भू वैज्ञानिक कर सकें. देश विदेश के भू वैज्ञानिक यहां आयें और शोध का आदान प्रदान करें.

जीवाश्म के शोध में संथाल के छात्र बना सकते हैं करियर
साहिबगंज जिले में फॉसिल्स के शोध् अध्ययन से palaeoclimate condition का पता लगेगा, जिससे environment के future planning में मदद मिलेगी. देश में ग्रामीण विकास काफी तेजी से हो रही है. संथाल परगना क्षेत्र का विकास तभी हो सकता है जब आदिवासियों के विकास को प्राथमिकता दिया जाये. अगर जीवाश्म पर अध्ययन और शोध की अच्छी व्यवस्था हो तो यहां के आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए संभावनाओं का नया द्वार खुलेगा.

सरकार के पास लंबित है फॉसिल्स पार्क बनाने का प्रस्ताव

जिले के वन पदाधिकारी ने बताया की साहेबगंज की राजमहल पहाड़ी शृंखला में अवशेषों के भंडार पड़े हुए हैं. मंडरो के तारा पहाड़ में मिलने वाले पादप जीवाश्व को संरक्षित करने के लिए फॉसिल्स पार्क बनाने को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है, जो फिलहाल लंबित है, जैसे ही वहां से आदेश आयेगा फोसील्स पार्क का निर्माण शुरू हो जायेगा. 

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