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शिकायतकर्ता से बिना बात किये ही मुख्यमंत्री जनसंवाद में बंद कर दी गयी शिकायत, अधिकारी ने कहा शिकायतकर्ता की सहमति से बंद की गयी शिकायत

Ranchi: जनता की बात मुख्यमंत्री तक सीधी पहुंचे. इसी विचार के साथ मुश्यमंत्री जनसंवाद या कहें सीधी बात की शुरुआत झारखंड में की गयी. लेकिन यहां हो कुछ और ही रहा है. जनसंवाद में बैठे लोग ना ही जनता की शिकायतों की ठीक से जवाब देते हैं और ना ही सही रूप से कार्रवाई हो रही है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है. इस मामले में दर्ज शिकायत पर जनसंवाद की तरफ से कहा गया कि शिकायतकर्ता से बातचीत कर शिकायत बंद की जाती है. जबकि जनवंसाद के अधिकारियों की तरफ से एक बार भी कॉल शिकायतकर्ता के पास नहीं गया. ऐसा एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार किया गया. ऐसे में मुख्यमंत्री जनसंवाद की कार्यप्रणाली पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

Ranchi: जनता की बात मुख्यमंत्री तक सीधी पहुंचे. इसी विचार के साथ मुश्यमंत्री जनसंवाद या कहें सीधी बात की शुरुआत झारखंड में की गयी. लेकिन यहां हो कुछ और ही रहा है. जनसंवाद में बैठे लोग ना ही जनता की शिकायतों की ठीक से जवाब देते हैं और ना ही सही रूप से कार्रवाई हो रही है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है. इस मामले में दर्ज शिकायत पर जनसंवाद की तरफ से कहा गया कि शिकायतकर्ता से बातचीत कर शिकायत बंद कर दी गई. जबकि जनवंसाद के अधिकारियों की तरफ से एक बार भी कॉल शिकायतकर्ता के पास नहीं गया. ऐसा एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार किया गया. ऐसे में मुख्यमंत्री जनसंवाद की कार्यप्रणाली पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

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तीन बार की गयी शिकायत, हर बार बंद कर दी गयी

पाकुड़ जिला के मामले में देवघर निवासी गोपाल गौतम ने मनरेगा योजना में हुई गड़बड़ियों को लेकर मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत करना चाहते थे. पहली बार उन्होंने अपनी शिकायत हिंदी भाषा में की. लेकिन उन्होंने इसकी टाइपिंग अंग्रेजी में कर दी. इसपर जनसंवाद से इनके पास फोन आया और मामले को हिंदी में टाइप कर भेजने को कहा गया. वहीं कहा गया कि उन्होंने शिकायत के एवज में किसी तरह के कोई साक्ष्य नहीं लगाये हैं. जबकि साक्ष्य के रूप में आरटीआई से निकाले गये कई दस्तावेज अपलोड किए गए थे. फिर भी इन दोनों को आधार बनाते हुए शिकायत बंद कर दी गयी.

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कोई कॉल नहीं आया, लेकिन कहा गया शिकायतकर्ता से हुई है बात

दूसरी बार गोपाल ने फिर से शिकायत दर्ज करायी. इस बार शिकायत हिंदी में टाइप कर की गयी. साक्ष्य भी लगाये गये. दूसरी बार किसी तरह का कोई कॉल गोपाल के पास नहीं आया. लेकिन एक्शन टेकन बाय अफसर वाले कॉलम में लिखा गया कि शिकायतकर्ता से बात होने के बाद शिकायत बंद की जा रही है. तीसरी बार फिर से मनरेगा में हुई गड़बड़ को लेकर गोपाल ने शिकायकत की. सारे साक्ष्य भी लगाये गये. लेकिन तीसरी बार भी एक्शन टेकन बाय अफसर वाले कॉलम में लिखा गया कि शिकायतकर्ता से बात होने के बाद शिकायत बंद की जा रही है और शिकायत बंद कर दी गयी.  

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क्या की थी गोपाल ने शिकायत

झारखंड के पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड में वित्तवर्ष 2009-10 और 2010-11 में मनरेगा के तहत 12 योजनाओं में जांच के बाद कार्रवाई लंबित है. पाकुड़ के एक पत्रकार कार्तिक रजक प्रशासन और समाज में अपने अखबार के माध्यम से गलत भ्रम फैला रहे हैं. क्योंकि उपायुक्त पाकुड़ ने कार्रवाई से संबंधित संचिका में प्रखंड विकास पदाधिकारी रोशन शाह से लेकर रोजगार सेवक तक अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई है, डीडीसी पाकुड़ से पूछा है. जिसका खुलासा एक आरटीआई से हुआ है. इस मामले में सभी दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये. साथ ही समाज और प्रशासन में गलत खबर फैलाने वाले पत्रकार को भी दंडित किया जाये.

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मुख्यमंत्री जनसंवाद को भी मैनेज कर लिया जा रहा हैः गोपाल

शिकायत के बाद बिना शिकायतकर्ता से बात किये अपने मन से शिकायत बंद काम एक बार नहीं बल्कि दो बार किया गया है. इससे पता चलता है कि जिसके विरुद्ध शिकायत है, वो मुख्यमंत्री जनसंवाद को भी मैनेज कर लेते हैं. मैं सीएम साहब से आग्रह करता हूं कि इस तरह के लोग जो आपकी छवि को खराब करने में लगे उसपर जल्द-से-जल्द कड़ी-से-कड़ी कार्रवाई हो.

मामले पर विभाग के सचिव सुनील बर्णवाल से बात करने की कोशिश की गयी. लेकिन उनसे बात नहीं हो पायी. एसएमएस के जरिए उन्हें सवाल भेजे गये हैं. जवाब आते ही जवाब को खबर में जोड़ दिया जायेगा.

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