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लातेहारः मुठभेड़ में जेजेएमपी का उग्रवादी ढेर, शुक्रवार को लगायी थी जन अदालत

Latehar: लातेहार के छिपादोहर थाना क्षेत्र में पुलिस और जेजेएमपी के उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ की खबर है. सूचना के मुताबिक मुठभेड़ में पुलिस ने एक उग्रवादी को मार गिराया है. हालांकि पुलिस अफसरोंं ने अभी इस खबर की पुष्टि नहीं की है. जानकारी के मुताबिक सीआरपीएफ और जिला पुलिस की टीम जेजेएमपी उग्रवादियों के खिलाफ छापामारी करने निकली थी. छिपादोहर थाना क्षेत्र के जोबो गांव में पुलिस की जेजेएमपी के उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ हो गयी.

उल्लेखनीय है कि  लातेहार के मनिका थाना क्षेत्र के कुरुमखेता गांव में जेजेएमपी के उग्रवादियों ने जन अदालत लगाया था. तीन जून को न्यूज विंग ने इससे संबंधित खबर प्रकाशित की थी. जिसके बाद पुलिस की टीम सोमवार की सुबह छापामारी करने निकली थी.

इसे भी पढ़ेंः कुमंडी पुलिस पिकेट से महज सात किमी की दूरी पर जेजेएमपी के उग्रवादियों ने जन अदालत लगाकर ग्रामीणों को पीटा

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जानकारी के मुताबिक कुरुमखेता गांव में बीड़ी पत्ता की खरीदारी को लेकर बीते शुक्रवार को दो ग्रामीण के गुट में झगड़ा हुआ था और बीड़ी  पत्ते के खलिहान में आग लगा दी गई थी. जिसके बाद एक गुट ने मामले को लेकर प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन झारखण्ड जन मुक्ति परिसद (जेजेएमपी) से शिकायत की थी. शिकायत पर एक पक्षीय कार्रवाई करते हुये जेजेएमपी के उग्रवादियों ने जन अदालत लगाकर दूसरे गुट के दो लोगों को बेरहमी से दस-दस लाठी पीटा और दस-दस हज़ार रुपया का जुर्माना वसूला.  पुलिस इसी सूचना पर इलाके में छापामारी करने निकली थी.

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2013 तक मनिका थाना क्षेत्र का कुमंडी ग्राम नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का गढ़ रहा था

सूत्रों की मानें तो मामले की जानकारी छिपादोहर थाना पुलिस को है, मगर वे जेजेएमपी के ऊपर कार्रवाई नहीं कर रही है. ज्ञात हो कि मनिका थाना क्षेत्र का कुमंडी ग्राम नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का गढ़  होने के साथ-साथ संगठन का हेड क्वार्टर माना जाता था, इलाके में माओवादियों का वर्चस्व था. इसी कुमंडी के कटिया जंगल में भाकपा माओवादियों ने वर्ष 2013 में सीआरपीएफ के दस जवानों को मौत के घाट उतारते हुए उनके पेट में बम प्लांट किया था. मामले को संज्ञान में लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने माओवादियों के गढ़ को समाप्त करने के लिए तीन वर्ष पूर्व 2016 में पुलिस पिकेट की स्थापना कर सुरक्षा बल सीआरपीएफ को पिकेट सौंपा. पिकेट बनने से भाकपा माओवादियों ने इलाका तो छोड़ दिया, मगर छोटे उग्रवादी संगठन इलाके में अपना पैर जमाने में कामयाब रहे. ये बेवस आदिवासियों को बेवजह अपने लाभ के लिए मारते-पीटते रहते हैं. वहीं पुलिस कुमंडी के जंगलों में केवल खानापूर्ति करते नज़र आ रही है. ज्ञात हो कि कुमंडी पुलिस पिकेट और इलाके में रहने वाले ग्राम एवं ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेवारी सीआरपीएफ 214 बटालियन की है.  

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