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राष्ट्रपति शासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ‘आप’

नई दिल्ली: दिल्ली में जन लोकपाल के मुद्दे पर इस्तीफा देकर तत्काल चुनाव की तैयारी में जुटी आम आदमी पार्टी (आप) अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गई है। विधानसभा को निलंबित रखने के फैसले को कानूनी रूप से गलत करार देते हुए पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार को विधानसभा भंग करने और चुनाव करवाने का निर्देश दे।

पिछले डेढ़-दो महीनों में गरम रही दिल्ली की राजनीति विधानसभा निलंबन के बावजूद ठंडी नहीं हो रही है। तकरार और बढ़ने लगी है। 14 फरवरी को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने इस्तीफे के साथ ही उपराज्यपाल के पास विधानसभा भंग करने का भी प्रस्ताव भेजा था। 16 फरवरी को राष्ट्रपति शासन का आदेश जारी हो गया। आप इसके लिए तैयार नहीं है। चुनाव हो या न हो, इसके बहाने पार्टी लोकसभा चुनाव की भी तैयारी पर जोर देना चाहती है।

बृहस्पतिवार को पार्टी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और राष्ट्रपति शासन के फैसले को चुनौती दी। याचिका में पिछले डेढ़-दो महीने के घटनाक्रम का विवरण देते हुए कांग्रेस और केंद्र सरकार की मंशा पर उंगली उठाई गई है।

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याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुसार उपराज्यपाल मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर काम करते हैं। केजरीवाल सरकार ने जब विधानसभा भंग करने का फैसला लिया तो सरकार के पास बहुमत था। जन लोकपाल विधेयक गिरने के बावजूद दो अन्य विधेयक बहुमत से पारित किए गए थे। लेकिन बहुमत की सरकार को नजरअंदाज कर विधानसभा निलंबित कर चुनाव टाल दिया गया है। याचिका में खुल कर केंद्र सरकार पर आरोप लगाए गए। कहा गया कि विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पराजित कांग्रेस अब परोक्ष रूप से दिल्ली पर शासन करना चाहती है। कांग्रेस के कई नेता जांच के दायरे में हैं। उसे भी दबाने की कोशिश हो रही है। यही कारण है कि अब सरकार गठन के लिए कोई संभावना न होने के बावजूद चुनाव को टालने की कोशिश हो रही है। आप ने कहा कि लोकसभा चुनाव निकट है और उसके साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव भी होते हैं तो कई खर्चो से बचा जा सकता है।

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