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राज्यसभा में अलग-अलग मुद्दों को लेकर हंगामा, कार्यवाही स्थगित

New Delhi : राज्यसभा में सोमवार को पीएनबी घोटाला, आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज की मांग, कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन सहित अलग अलग मुद्दों को लेकर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी है. गौरतलब है कि हंगामे की वजह से सदन पहले ही 11 बज कर दस मिनट पर दस मिनट के लिए स्थगित की गयी थी. इसके बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू की गयी लेकिन फिर से हंगामे के कारण दोपहर दो बजे तक के लिए बैठक स्थगित कर दी गयी. हंगामे के कारण उच्च सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल दोनों ही नहीं हो पाये.

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किस पार्टी की क्या रही मांग

तृणमूल कांग्रेस के सदस्य पीएनबी घोटाले को लेकर नारे लगा रहे थे वहीं अन्नाद्रमुक तथा द्रमुक के सदस्य कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर कावेरी प्रबंधन बोर्ड गठित करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू कराने की मांग कर रहे थे. तेदेपा और कांग्रेस के सदस्य आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम को पूरी तरह लागू करने और विशेष पैकेज की मांग कर रहे थे. उन्होंने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं.अन्नाद्रमुक, द्रमुक, तेदेपा, तृणमूल कांग्रेस के सदस्य तथा कांग्रेस के केवीपी रामचंद्र राव आसन के समक्ष आ कर अपनी अपनी मांग के समर्थन में नारे लगाने लगे. सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों को अपने स्थानों पर लौट जाने को कहा. अपनी बात का असर न होते देख उन्होंने 11 बजे कर दस मिनट पर बैठक को दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया.

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सभापति ने कहा क्या हम संसद में हैं या कहीं और

एक बार के स्थगन के बाद बैठक शुरू होने पर सदन में वही नजारा था. सभापति ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि उनके मुद्दों पर समुचित नियमों के तहत चर्चा की अनुमति दी जायेगी. लेकिन हंगामा जारी रहा. उन्होंने नारे लगा रहे सदस्यों से कहा कि क्या हम संसद में हैं या कहीं और हैं.

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नियम 267 के तहत विभिन्न सदस्यों की ओर से प्राप्त हुए नोटिस : नायडू

नायडू ने कहा कि उन्हें नियम 267 के तहत विभिन्न सदस्यों की ओर से नोटिस प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक में धोखाधड़ी का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है. पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाले इस मुद्दे पर सदन में चर्चा करने की जरूरत है. ‘‘मैं खुद इस बात से सहमत हूं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य गुलाम नबी आजाद, पार्टी के उप नेता आनंद शर्मा, प्रमोद तिवारी, भाकपा के डी राजा, तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय आदि ने कामकाज स्थगित कर चर्चा करने के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिये हैं. लेकिन वह इन नोटिसों को स्वीकार नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह नियम 176 के तहत चर्चा की अनुमति दे सकते हैं. इस नियम के तहत लोकमहत्व से जुड़े मुद्दे पर औपचारिक प्रस्ताव या मतदान के बिना अल्पकालिक चर्चा की जा सकती है. नायडू ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देने से पहले वह समय तय करने के बारे में सरकार और सदन के नेता के साथ बात करेंगे. अन्नाद्रमुक और द्रमुक ने कावेरी जल के मुद्दे पर नोटिस दिया था. नायडू ने कहा कि इस मुद्दे को वह शून्यकाल के तहत उठाने की अनुमति देंगे.

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सदन की गरिमा मत गिराइये : नायडू

तेदेपा और कांग्रेस के केवीपी रामचंद्र राव ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम को पूरी तरह लागू करने और विशेष पैकेज की मांग उठायी. नायडू ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा की जा चुकी है और सदस्य अगर आगे भी चर्चा चाहते हैं तो समुचित नियम के तहत नोटिस दें. उन्होंने कहा कि भाजपा के विनय सहस्रबुद्धे ने एक पूर्व मंत्री के संबंधियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार किए जाने को लेकर नियम 267 के तहत नोटिस दिया है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण है लेकिन वह इस पर नियम 267 के तहत चर्चा की अनुमति नहीं देंगे. ‘‘समुचित नियम के तहत नोटिस दिया जाये. सभापति ने सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने और कार्यवाही चलने देने के लिए कहा. लेकिन हंगामा जारी रहा. तृणमूल सदस्य पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी को वापस लाने की मांग कर रहे थे. तेदेपा सदस्य और कांग्रेस के राव अपनी मांग के समर्थन में पोस्टर ले कर खड़े थे. सभापति ने उनसे सदन में पोस्टर न दिखाने को कहा. नायडू ने कहा कि आप सदन में हैं, हंगामा मत कीजिये, सदन की गरिमा मत गिराइये. यह कोई तरीका नहीं है. उन्होंने सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने को कहा. सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने 11 बज कर करीब 27 मिनट पर बैठक को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया.

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