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रांची : नगर निगम नहीं लेता इंद्रा नगर कुष्ठ बस्ती की सुध, फिर भी है बिल्कुल स्वच्छ

Ranchi : एक तरफ शहर को स्वच्छ बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और साल भर से रांची नगर निगम की टीम इस काम में लगी हुई है. फिर भी सड़कों पर गंदगी आये दिन देखने को मिल ही जाती है. फिर भी नगर निगम अपनी पीठ थपथपाते नहीं थकती. लेकिन शहर से दूर जेएससीए स्टेडियम के पास बसी इंद्रा नगर कुष्ठ बस्ती की तस्वीर स्वच्छता की मिसाल है. बस फर्क इतना है कि यहां सड़कों को साफ सुथरा बनाने में निगम का कोई योगदान नहीं है. बल्कि बस्ती के लोगों की जागरुकता का असर है. इन कुष्ठ रोगियों का काम ऐसा है कि शहरवासियों और रांची नगर निगम को इनकी मिसाल दी जाती है.  

खुद ही सुबह करते हैं सफाई

185 घरों की इस बस्ती में सड़के, नाली चकाचक मिलेंगी. यहां के लोग अपने-अपने द्वार और सड़कों की सफाई में सुबह के वक्त खुद ही लग जाते हैं. मुखिया मुरली स्वामी कहते हैं कि गांव की साफ-सफाई किसी के भरोसे नहीं है. सुबह होते ही लोग सड़कों की सफाई में लग जाते हैं. निगम की गाड़ी महीने में एक या दो बार कचरा उठाने आती है. दूसरी खास बात यह भी है कि यह बस्ती पूरी तरह से ओडीएफ है. स्वामी कहते हैं कि लगभग हर घर में शौचालय है. इसके अलावा 10-15 शौचालय लायंस क्लब के सहयोग से बनाया गया है, जिसे गांव के सभी लोग इस्तेमाल करते हैं. यह बस्ती 60 वर्ष पहले बसी थी.

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 लोगों की मांग, मकान बनाकर दे सरकार

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बस्ती के निर्मल ठाकुर कहते हैं कि यहां 50 साल से रह रहा हूं. जब घर वालों को लोगों ने कहा कि तुम्हारा लड़का कुष्ठरोगी है, उसे हटा दो. जबकि एक अन्य शख्स आनंद अधिकारी बताते हैं कि 30 साल पहले जब दीदी के ससुर ने कहा था कि मैं तुम्हें इसलिए मायके नहीं जाने दूंगा, क्योंकि तुम्हारा भाई कुष्ठरोगी है. उसी वक्त मैं घर छोड़कर यहां चला आया था. मीना, भोला महतो जैसे कई लोग भी इसी तरह समाज से बहिष्कृत होकर यहां आकर बसे थे. 1984 से पहले तक इस गांव को कोढ़िया बस्ती कहकर लोग पुकारते थे. लेकिन इसके बाद इसे इंद्रा नगर कुष्ठ आश्रम का नाम दिया गया. फिलहाल यहां एक प्राइवेट प्राइमरी स्कूल है. जबकि योगदा सत्संग मठ भी है, जिसमें कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए बुधवार और शनिवार को डॉक्टर बैठते हैं. अधिकांश लोग भिक्षा से ही जीवन यापन करते हैं. गांव वालों की मांग है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने वादा किया है कि सभी को मकान बनाकर देंगे. बस हमलोगों को घर बनाकर दे दिया जाये.

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