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रांचीः ई-रिक्शा के युग ने पैडल रिक्शा चालकों की जिंदगी में लगाया ब्रेक

News Wing
Ranchi, 09 November: पहिये की रफ्तार थम गयी और जमाना रफ्तार से बदल गया. आधुनिकता के दौर में गरीबों से निवाला रूठा तो दुनिया के रफ्तार में पैडल रिक्शा पीछे छूट गया. ये पंक्तियां उन रिक्शा चालकों की व्यथा को चरितार्थ करता है जिनके लिए दो वक्त की रोटी का माध्यम सिमटता जा रहा है.

ई-रिक्शा ने ले ली पैडल रिक्शा की जगह

एक वक्त था जब शहर की सड़कें रिक्शा से भरी होती थीं. तब इस सवारी का लोग लुत्फ भी उठाया करते थे. चौक- चौराहों पर खड़े दर्जनों रिक्शावाले यात्रियों का इंतजार किया करते थे. पर अब विज्ञान की इस दुनिया में बदलता वक्त इन्हें बेरोजगारी और अंधकार की और धेकेल रहा है. मानवीय श्रम से खिंचे जाने वाले रिक्शा की जगह पहले ऑटो ले ली और अब उसके बाद यह जगह अत्याधुनिक बैटरी रिक्शा ने ले ली है. बैटरी रिक्शा की पहुंच शहर के हर मार्ग पर है. नतीजा पैडल रिक्शा चालक दाने-दाने तक को मोहताज हो रहे हैं.

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परिवार चलाना हो गया है मुश्किल: अर्जुन

पैडल रिक्शा चालक अर्जुन ने कहा कि एक दौर था जब हर रोज 300 से 400 कमाई होती थी. लेकिन अब 100 रुपए तक कमाने में पसीने छूट जा रहे हैं. जबकि रिक्शा मालिक को प्रतिदिन 50 रुपया किराया भी चुकाना पड़ता है. ऐसे में परिवार के भरण-पोषण के बाद इस युग में जीने के लिए इतना पैसा भी नहीं कि परिवार की गाड़ी बेहतर ढंग से खींच सके.

कम किराये पर होता है सफर: महजबी

यात्रि महजबी की मानें तो ई-रिक्शा कम किराए में जल्दी सफर करवाता है. लेकिन पैडल रिक्शा का सफर जल्दबाजी की दुनिया में पीछे छूटता जा रहा है.अब लोग भी नई और अत्याधुनिक तकनीक से बनी ई- रिक्शा को ही पसंद करने लगे हैं. पैडल रिक्शा चालकों की स्थिति को देख कर अफसोस होता है.

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