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रघुवर सरकार की आदिवासी विकास समिति के कार्यों की घोषणा से भड़का मुखिया संघ झारखंड

Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास के द्वारा बुधवार को प्रोजेक्ट भवन में ग्राम विकास समिति और आदिवासी विकास समिति की ओर से किये जाने वाले कार्य के निर्धारण की बैठक के बाद की गई घोषणा के बाद राज्य के मुखिया के बीच आक्रोश पुण: दिखने लगा है. मुखिया संघ झारखण्ड प्रदेश संयोजक विकाश कुमार महतो ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री महोदय सिर्फ ग्रामीणों को बरगलाने का कम कर रहे हैं. रघुवर सरकार जिन योजनाओं की बात कर रही है वे सभी योजनाएं मनरेगा के अंतर्गत आती है. चाहे वह डोभा निर्माण का कार्य हो या तालाब, बोराबांध, कुआं या चेकडैम का मामला हो. इस तरह की योजनाओं का क्रियान्वयन मजदूरों के माध्यम से रोजगार गारंटी के लिए होती है. यह सरकार कोई अलग से बजट का प्रवाधन नहीं कर रही है. आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति बनाने की घोषणा के बाद सरकार सिर्फ लेबल बदलने का काम कर रही है, यह कही न कही राजनीति से प्रेरित योजना है.

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राज्य में इस तरह का प्रावधान पूर्व में ही लागू है

राज्य सरकार पहले से ही कृषि विभाग, भूमि सरंक्षण विभाग, मत्स्य विभाग के माध्यम से 80% और 20% की योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है, जिसमें  सरकार के द्वारा 80% अनुदान दिया जाता है और शेष लागत का 20% राशि लाभुक समिति या लाभुक देते हैं.

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पंचायत के अधिकारों को नहीं देना चाहती है सरकार

सरकार पहले पंचायत को जो 14 विभाग और 29 विषय का अधिकार जो पंचायत को मिलना है, वो तो दे नहीं रही है, अब समिति को क्या अधिकार देगी सरकार.

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मनरेगा योजना में राशि का अभाव

राज्य में चल रही कूप निर्माण और बकरी एवं मुर्गी शेड निर्माण का कम रूका हुआ है, इसमें बीते 6 महीने से पैसा नहीं दे पा रही है सरकार, जबकि आने वाले बारिश के मैसम में सभी कूप धंसने की कगार पर हो जायेंगे.

विकाश कुमार महतो ने अपने प्रेस बायन में कहा कि मैं मुख्यमंत्री महोदय को बताना चाहता हूं कि जिस संविधान ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया है उसी संविधान के तहत हम मुखिया बने हैं, फिर वो अपने हर कार्यक्रम में सिर्फ मुखिया पर ही क्यूं बात करते हैं. आज तक राज्य में राज्य वित्त आयोग का तो वो गठन नहीं कर पाए हैं न ही राज्य सरकार ने पंचायत को कुछ दिया. आज राज्य सरकार जिन योजनाओं की वाहवाही लूटने में लगी है वो सारी योजनाओं को शिखर पर हम मुखियाओं ने पहुंचाया है, चाहे वो डोभा निर्माण हो, पंचायतों को ओडीएफ करना हो, चाहे पेंशन, चाहे प्रधानमंत्री उज्जवला योजना हो, पंचायत स्तर का कोई भी कार्य हो.

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