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मुख्यालय की चाहत, डीजीपी को मिला पांच लाख तक इनाम घोषित करने का अधिकार, सरकार से अनुमति की जरूरत नहीं

 पुलिस मुख्यालय ने दिया इनामी नक्सलियों की संख्या असीमित करने का भी प्रस्ताव

Chandi dutt jha

Ranchi: झारखंड पुलिस चाहती है कि नक्सलियों-उग्रवादियों पर पांच लाख रुपये तक के इनाम की घोषणा का अधिकार डीजीपी को मिले. इतना ही नहीं इनाम की घोषणा के लिए सरकार से अनुमति की जरुरत भी ना हो. अभी डीजीपी को यह अधिकार है कि वह सत्यापित नक्सलियों व उग्रवादियों पर दो लाख रुपये तक के इनाम की घोषणा कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है. पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित एक प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा है. सरकार उस प्रस्ताव पर विचार कर रही है.

Sanjeevani

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पीएलएफआई के कथित उग्रवादियों के सरेंडर में हुई थी फजीहत

वर्ष 2016 में चाईबासा पुलिस ने पीएलएफआई के कथित नौ उग्रवादियों को सरेंडर कराया था. जिसपर डीजीपी के स्तर से इनाम की घोषणा कर दी गयी थी. लेकिन इनाम की घोषणा करने से पहले डीजीपी ने सरकार से स्वीकृति नहीं ली थी. जिसे सरकार ने गंभीरता से लिया था. गृह विभाग के अधिकारियों ने तब संचिका पर डीजीपी डीके पांडेय और पुलिस विभाग के अफसरों पर गंभीर टिप्पणी की थी. जिसमें यह भी कहा गया था कि जिन नौ लोगों को पीएलएफआई का उग्रवादी बताकर सरेंडर कराया गया, उनमें कई नाबालिग हैं. एक को छोड़कर किसी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है. फिर कैसे उन पर इनाम घोषित कर दिया गया. इस प्रकरण में पुलिस मुख्यालय की बड़ी फजीहत हुई थी. तभी से पुलिस मुख्यालय के कुछ अधिकारी इस कोशिश में हैं कि इनाम की घोषणा को लेकर जो नियम हैं, उसमें परिवर्तन किया जाये.

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इनामी नक्सलियों की संख्या 200 से बढ़ाकर 400 करने का प्रस्ताव

पुलिस मुख्यालय के स्तर से जो प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, उसमें यह भी कहा गया है कि इनामी नक्सलियों की संख्या 400 या असिमित की जाये. अभी यह संख्या 200 है. इस वजह से सरकार एक समय में अधिकतम 200 नक्सलियों-उग्रवादियों के खिलाफ ही इनाम की घोषणा कर सकती है. उल्लेखनीय है कि झारखंड में नक्सलियों के सरेंडर पर लगातार विवाद होता रहा है. एेसे कई उदाहरण मौजूद हैं, जिसमें यह देखा गया कि नक्सलियों ने पहले पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. बाद में उसके उपर जारी इनाम की राशि को बढ़ा दिया गया. फिर सरेंडर दिखाया गया. मीडिया में खबरें आने और सबूत रहने के बाद भी सरकार या पुलिस मुख्यालय ने न तो आरोपों की जांच करायी और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की. 

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514 युवकों को फर्जी तरीके से नक्सली बताकर सरेंडर कराने के मामले में फंसे हैं कई अफसर

 झारखंड पुलिस की दामन पर 514 युवकों को फर्जी तरीके से नक्सली बताकर सरेंडर कराने के दाग लगे हुए हैं.  युवकों से करोड़ों रुपये की वसूली भी की गयी थी. इस मामले में पुलिस मुख्यालय के कई बड़े अधिकारी फंसे हुए हैं. मामले में सीआरपीएफ के अधिकारी भी शामिल थे. यह सारा खेल तब हुआ था, जब सीआरपीएफ के झारखंड सेक्टर के आइजी डीके पांडेय थे. डीके पांडेय अभी झारखंड पुलिस के डीजीपी हैं. लेकिन मामले की जांच नहीं हुई. इस कारण किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है.

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