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मुंडा ने केंद्र की नीतियों पर जमकर किया कटाक्ष

नयी दिल्ली/ रांची : दिल्ली में आयोग के साथ चली दो घंटे की बैठक में मुख्यमंत्री की अगुवाई में राज्य सरकार के अधिकारी पूरी तरह हावी दिखे. आयोग के सदस्यों के सभी सवालों का जवाब दिया गया.

इससे आयोग के सदस्य काफी खुश दिखे. मुख्यमंत्री मुंडा ने केंद्र की नीतियों पर जमकर कटाक्ष किया. एक सदस्य ने बाद में कहा कि योजना आकार को लेकर झारखंड ने अन्य राज्यों की तुलना में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया.

सदस्य के अनुसार, योजना राशि के कम खर्च के बावजूद राज्य सराकर ने बैकफुट पर डिफेंसिव नहीं, बल्कि फंट्रफुट पर एग्रेसिव एप्रोच अपनाया. खुद योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने बैठक के दौरान कहा-‘स्टेट रिकवर वेरी वेल.’

झारखंड के योजना व विकास सचिव अविनाश कुमार ने लगभग चार बजे पॉवर प्वांइट प्रजेंटेशन के माध्यम से राज्य की एक-एक उपलब्धियां और मांगों को रखना शुरू किया. योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया शिक्षा के विषय पर टोकते हुए पारा टीचर का सवाल उठाया.

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इस पर मुख्य सचिव एसके चौधरी ने जवाब दिया. उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से संबंधित उपलब्धियों और अन्य दूसरे हालात को बयान किया. इसके बाद जल संसाधन, सड़क परिवहन, ऊर्जा, वन आदि क्षेत्र का उल्लेख किया गया.

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राज्य सरकार की ओर से वन क्षेत्रों में रहने वाले एक लाख लोगों को मदद मुहैया कराने की बात कही गयी. वहीं खनन क्षेत्र में केंद्रीय नीति पर निर्भर होने की बात कही गयी. सामाजिक क्षेत्र में केंद्र से विशेष पैकेज की मांग की गयी.
इसी बीच फिर एक बार अहलूवालिया ने टोका कि क्या आप राज्य में खनिज उत्पादन से संतुष्ट हैं. यहीं पर सीएम अर्जुन मुंडा ने कमान संभाला. उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे के साथ हमें लोगों का भी ख्याल रखना होगा.

लोगों का जुड़ाव जितना होगा, उतनी ही शांति बढ़ेगी. केंद्र की नीति है कि ज्यादा से ज्यादा खनन किया जाये, और इसके कारण उग्रवाद की समस्या बढ़ रही है. प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े बढ़ जाते हैं, लेकिन आम लोगों के हालात में सुधार नहीं होता है.

इस जवाब से योजना आयोग के सदस्य न सिर्फ सहमत दिखे, बल्कि आगे के सवाल पर भी नरम हो गये. एनटीपीसी के कर्णपुरा प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 10 साल का वक्त मंजूरी देने में लगा. इसके लिए राज्य सरकार को जल कुंड बनाने को कहा गया. जब काम शुरू हुआ तो कहा गया कि यहां 300 मीटर नीचे कोयला है.

स्वर्णरेखा सहित 30 सिंचाई परियोजनाएं मंजूरी के बिना लंबित हैं. इस पर अहलूवालिया ने रिपोर्ट भेजने को कहा. वहीं आयोग की सदस्य सैयदा हमीद ने अल्पसंख्यक जिला विकास योजना में कम खर्च का सवाल उठाया तो वहीं आदिवासी बालिका विद्यालय को लेकर प्रशंसा भी की.

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोटेंक सिंह अहलूवालिया ने 11 अगस्त को रांची आने की बात कही है. श्री मुंडा ने श्री अहलूवालिया से झारखंड में सुखाड़ की स्थिति की चर्चा करते हुए विशेष सहायता की मांग की थी. अहलूवालिया ने झारखंड के सिल्क उत्पादों की भी तारीफ की.

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