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मप्र में बारिश से हालात बिगड़े, सेना बुलाई गई

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भोपाल: मध्यप्रदेश में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदी-नालों में उफान आ गया है, पुल-पुलिया और बांधों के क्षतिग्रस्त होने से गांवों व शहरी बस्तियों में जलभराव हो रहा है। राहत और बचाव के लिए सेना, हेलीकॉप्टर व नावों की मदद लेनी पड़ रही है। राज्य के कई हिस्सों में शुक्रवार को भी बारिश का दौर जारी रहा। इस कारण राज्य की प्रमुख नदियां- नर्मदा, बेतवा, जामनी, धसान, सुनार, कोपरा, बीला, जमड़ार, टमस का जलस्तर उफान पर रहा। इसके चलते सतना, टीकमगढ़, जबलपुर, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़ और पन्ना जिले में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।

बाढ़ नियंत्रण अधिकारी और होमगार्ड की कमांडेंट मधुराजे तिवारी ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि जिले के तिजेला, कुपालपुर, उचवा टोला सहित कई गांवों में पानी भर गया है। बीते दो दिनों में इन गांवों से लगभग एक हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

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तिवारी के अनुसार, जिले की स्थिति में सुधार आ रहा है, मगर अब भी कई बस्तियों और गांव में पानी भरा हुआ है। यहां जो लोग फंसे हैं, उन्हें सुरक्षित निकालने और बेघर हुए लोगों तक खाद्य सामग्री व पीने का पानी पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जिले में राहत और बचाव के लिए जबलपुर से सेना बुलाई गई है। सेना यहां गुरुवार को पहुंची है।

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वहीं रीवा जिले में पूर्वा फॉल में अचानक पानी आ जाने से सेमरिया क्षेत्र में बहे पांच सैनानियों का शुक्रवार तक पता नहीं चल पाया है।

जिला अधिकारी राहुल जैन के अनुसार, सिरमौर क्षेत्र में पानी से घिरने पर पेड़ पर चढ़े सात में से चार लोगों ने तैरकर अपनी जान बचा ली है, बाकी तीन लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में पड़ने वाले पांच जिलों- सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, और दमोह में हालात ऐसे हैं, जैसे बीते तीन दिनों में यहां बादल फट गए हों। यहा औसत तौर पर तीन दिनों में 300 मिली मीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। यही कारण है कि इस इलाके में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

बैतूल जिले में पिछले 36 घंटे से पहाड़ी क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश जारी है। इससे जहां सतपुड़ा डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं तवा नदी उफान पर है। छिंदवाड़ा जिले का पानी राजडोह नदी में आने से इस नदी के दोनों छोर पर ग्रामीण फंसे हैं। कई गांवों का पूरी तरह संपर्क टूट गया है।

इधर सतपुड़ा डैम से 12 हजार क्यूसेक पानी तवा नदी में छोड़े जाने से नांदिया घाट रपटे पर पानी की धार तेज रफ्तार में चल रही है। इस मार्ग से जुड़े चोपना स्थित पुनर्वास कैंप का 30 से ज्यादा गांवों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। यहां भी दोनों छोर पर काफी संख्या में ग्रामीण बाढ़ उतरने का इंतजार कर रहे हैं।

इसी तरह भोपाल, होशंगाबाद, रायसेन, विदिशा व सीहोर में बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। कई जिलों के जिलाधिकारियों ने शुक्रवार और शनिवार को स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है।

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