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मंत्री चंद्रप्रकाश जी, कभी नागरिकों की बफ शीट भी पढ़ लीजिए

मंत्री, चंद्रप्रकाश जी

आप और आपकी पार्टी सत्ता में रहने के हुनर में माहिर हैं और स्वाभाविक है कि चुनाव के लिए और अपने लिए धनोपार्जन में भी निपुण ही होंगे. अभी आपने तो बफ शीट जारी किया. लेकिन हुजूर कभी-कभी नागरिकों का बफ शीट भी पढ़िए.

– पिछली बार 1955  में जलाशय बना था और उसके बाद कोई नए जलाशय के लिए योजना नहीं बनी. तो बढ़ते आबादी के लिए पानी कहां से आएगा ? केवल जलमीनार और पाइप लगवाने से ही आपलोग और आपके ठीकेदार संतुष्ट हो जाते हैं. लेकिन जनता को पानी कौन देगा और कहां से देगा ?

Sanjeevani

रुक्का डैम में पानी कम होने पर पेयजल मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी ने अधिकारियों के साथ बैठक की. रुक्का डैम में पानी बचा रहे, इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सिकिदरी हाईडल प्रोजेक्ट को पानी रोकने का निर्देश दिया. साथ ही रुक्का डैम को लेकर मंत्री ने बफशीट भी जारी किया. इसे लेकर व्यवसायी आरपी शाही ने अपने फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखा है. हम उस पोस्ट को यहां प्रकाशित कर कर रहें हैं.

मंत्री, चंद्रप्रकाश जी

आप और आपकी पार्टी सत्ता में रहने के हुनर में माहिर हैं और स्वाभाविक है कि चुनाव के लिए और अपने लिए धनोपार्जन में भी निपुण ही होंगे. अभी आपने तो बफ शीट जारी किया. लेकिन हुजूर कभी-कभी नागरिकों का बफ शीट भी पढ़िए.

– पिछली बार 1955  में जलाशय बना था और उसके बाद कोई नए जलाशय के लिए योजना नहीं बनी. तो बढ़ते आबादी के लिए पानी कहां से आएगा ? केवल जलमीनार और पाइप लगवाने से ही आपलोग और आपके ठीकेदार संतुष्ट हो जाते हैं. लेकिन जनता को पानी कौन देगा और कहां से देगा ?

– अपने सरकार के प्रिय कंसल्टेंट मैनहर्ट (प्रिय इसलिए कि ब्लैकलिस्ट और बुलाने से शक तो हो ही जाता है) की रिपोर्ट देखिये. आपके कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी गिनने में और जोड़ने में तो निपुण हो ही गए होंगे. देखिये वस्तुस्थिति क्या है ? कहां से आएगा लोगों के लिए पानी ?  1908  से ही कागजों में कमी दिख रही है, जहां चतुर अधिकारी जोड़- तोड़ कर अधिक ही दिखते हैं.

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– स्मार्ट सिटी बनाने वाले मंत्री और सचिव, शायद सिंगापुर से जहाजों से पानी लाकर उन क्षेत्रों में पानी सप्लाई करेंगें, जहां  (हटिया, सिंह मोड़, धुर्वा इलाका) पहले हटिया जलाशय से आधा-अधूरा पानी दिया जाता था.   क्योंकि हटिया जलाशय से केवल स्मार्ट सिटी को पानी देना है ?

– शहरी विकास मंत्री व सचिव से भी कभी पूछिए कि अगर उसके देख-रेख में इतने तालाब और नदियां गायब हो रही हैं, तो पानी का प्राकृतिक संरक्षण कहां से होगा और जो लोग बोरिंग से काम चला रहे हैं, उनको पानी कहां से मिलेगा ? बोरिंग भी अब 500-600 फीट से नीचे चला गया है, अब तो तेल निकल आएगा ?
मेरी राय है की बड़ी योजना बनायें, लेकिन अच्छे कंसल्टेंट या अच्छे निपुण लोगों के परामर्श से.  और उसमें एक ही बार बड़ा निवेश कराएं.  अच्छे और कॉरपोरेट ठीकेदार से काम कराएं और एकमुस्त ही सब हो जायेगा. नागरिक भी प्रसन्न , आप और आपके अधिकारी भी प्रसन्न और भविष्य भी आशामय !

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(आरपी शाही के फेसबुक से साभार.)

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