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भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर आफत, कानून मंत्रालय ने संपत्ति जब्ती विधेयक के मसौदे को दी मंजूरी

News Wing
New Delhi, 
18 September : कानून मंत्रालय ने एक नये प्रावधान के साथ देश छोड़कर भागने वाले आर्थिक अपराधी और डिफाल्टरों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार देने वाले विधेयक के मसौदे पर सहमति दे दी है. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी.

मंत्रालय विधेयक को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश करने से पहले उसमें एक विशेष छूट वाला प्रावधान (सेविंग क्लाज) शामिल करना चाहता था. यह प्रावधान जिसे ‘सेविंग क्लाज’ कहा गया है, कानून में कुछ छूट उपलब्ध कराता है.

क्या होगा कानून का दायरा
प्रस्तावित कानून वैसे मामलों में लागू होगा जहां अपराध 100 करोड़ रुपये से अधिक के हो.
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 2017-18 के बजट भाषण में ऐसे भगोड़ों की संपत्ति जब्त करने को लेकर कानून में बदलाव या नया कानून लाने का वादा किया था. यह आर्थिक अपराध करने वालों को देश छोड़कर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने वाले आर्थिक अपराधियों पर अंकुश लगाने पर जोर देता है.

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विधेयक में वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) को आर्थिक अपराधी को भगोड़ा घोषित करने और संपत्ति जब्त करने को लेकर आवेदन देने की अनुमति देता है. एफआईयू वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाली तकनीकी खुफिया इकाई है. मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के तहत अदालत को मामले की सुनवाई की जिम्मेदारी दी जाएगी. 
वित्त मंत्रालय ने विधेयक पर कैबिनेट नोट का मसौदा तैयार किया था और उस पर कानून मंत्रालय की राय मांगी थी.

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मौजूदा कानूनी प्रावधानों पर प्रभाव
सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने विधेयक के प्रावधानों से सहमति जताते हुए इसमें विशेष छूट का प्रावधान शामिल करने का सुझाव दिया है. उसका कहना है कि प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों का मौजूदा कानून के प्रावधानों पर प्रभाव पड़ेगा, अत: उन प्रावधानों का असर बनाये रखने के लिये विधेयक में विशेष छूट वाला प्रावधान शामिल किया जाना चाहिए.
ऐसे मौजूदा कानून जिनके तहत अपराधियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है, उसमें प्रतिभूतिकरण और वित्तीय आस्तियों का पुनर्गठन एवं प्रतिभूति हितों का प्रवर्तन अधिनियम कानून, 2002 (सरफेसी), बैंकों के बकाये ऋण की वसूली और वित्तीय संस्थान कानून तथा दिवाला एवं ऋण शोधन संहिता (आईबीसी) शामिल हैं.

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