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ब्रिक्स देश चाहते हैं संयुक्त विकास बैंक

नई दिल्ली | पांच उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) एक संयुक्त विकास बैंक की स्थापना तथा अपनी मुद्रा में आपसी व्यापार के तौर तरीके तैयार करना चाहता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि गुरुवार को चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस विषय पर औपचारिक घोषणा हो सकती है।

पांचों देशों के नेता अपनी मुद्राओं में आपसी व्यापार के तौर तरीकों पर विचार कर सकते हैं।

दक्षिण अफ्रीका के व्यापार और उद्योग मंत्री रॉब डेविस ने आईएएनएस से कहा कि उनका देश एक ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना और मुद्रा विनिमय को अनुमति दिए जाने के पक्ष में है।

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डेविस ने कहा, “हम लोग कल वार्ता की मेज पर रखे जाने वाले कई प्रस्तावों के पक्ष में हैं।” उन्होंने कहा कि संयुक्त विकास बैंक तथा मुद्रा का इस्तेमाल जैसे मुद्दे शीर्ष वरीयता वाले हो सकते हैं।

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मुद्रा विनिमय के बारे में पूछने पर डेविस ने कहा, “इस पर राष्ट्रीय प्रमुखों की बैठक में चर्चा होगी। हम उसके पक्ष में हैं।”

अधिकारी ने कहा कि ईरान से व्यापार के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है। इस मुद्दे पर बुधवार को ब्रिक्स के व्यापार मंत्रियों की बैठक में भी चर्चा हुई।

चीन के वाणिज्य मंत्री चेन डेमिंग ने कहा कि ईरान से तेल आपूर्ति में बाधा होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था खासकर भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा। ये देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान पर काफी अधिक निर्भर हैं।

चेन ने कहा, “यदि तेल की कीमत बढ़ती रही, तो मंदी से उबरने की वैश्विक प्रक्रिया को नकारात्मक रूप में प्रभावित कर सकता है।”

उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप के दबाव के बाद भी चीन ईरान के साथ सामान्य व्यापार जारी रखेगा।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने भी कहा कि ईरान के साथ सामान्य व्यापारिक रिश्ते से संयुक्त राष्ट्र के किसी नियम का उल्लंघन नहीं होता है। (ज्ञानेंद्र कुमार केशरी)

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