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बेटा हूं मैं भारत का, इटली का नवासा हूं

” कहते हैं शब्द एक ऐसी शक्ति है, जिसका क्षय नहीं होता. इसका सार्थक प्रयोग सृजनशीलता का रूप ले लेता है. शब्द अगर काव्य का रूप लेता है तो गागर में भी सागर समा सकता है. काव्य के माध्यम से जीवन के विविध पहलुओं की सहज अभिव्यक्ति होती है. पत्रकार व लेखिका शायरा फिरदौस ख़ान ने राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी एक शख्सियत को अपने काव्य का विषय बनाया है और वो शख्स हैं राहुल गांधी, जिनके जीवन, उनके वजूद, राजनीतिक संघर्ष और भावनात्मक पक्ष को शब्दों के जरिए गजल में ढाला है. उम्मीद है राहुल गांधी के प्रशंसकों को शायरा की ये प्रस्तुति जरूर पसंद आएगी.”

प्रस्तुति – फिरदौस ख़ान

—–ग़ज़ल—–

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बेटा हूं मैं भारत का…

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भारत की मुहब्बत ही इस दिल का उजाला है

आंखों में मेरी बसता एक ख़्वाब निराला है

बेटा हूं मैं भारत का, इटली का नवासा हूं

रिश्तों को वफ़ाओं ने हर रूप में पाला है

राहों में सियासत की, ज़ंजीर है, कांटें हैं

सुख-दुख में सदा मुझको जनता ने संभाला है

धड़कन में बसा मेरी, इस देश की गरिमा का

मस्जिद कहीं, गिरजा कहीं, गुरुद्वारा, शिवाला है

बचपन से ले के अब तक ख़तरे में जां है, लेकिन

दुरवेशों की शफ़क़त का इस सर पे दुशाला है

नफ़रत, जलन, अदावत दिल में नहीं है मेरे

अख़लाक़ के सांचे में अल्लाह ने ढाला है

पतझड़ में, बहारों में, फ़िरदौस नज़ारों में

हर दौर में देखोगे राहुल ही ज़ियाला है

( शब्दार्थ : दुरवेश- संतअदावत- शत्रुता, अख़लाक़- संस्कारफ़िरदौस- स्वर्ग, ज़ियाला- उजाला )

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