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बिहार में जानवरों पर भी ठंड का असर

पटना, 9 जनवरी | पटना का ‘दिल’ कहे जाने वाले संजय गांधी जैविक उद्यान में कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण जानवरों व पक्षियों की चहलकदमी थम सी गई है। शेर भी अपनी मांद में दुबके हुए हैं तो भालू की शरारतें भी मंद पड़ गई हैं। चिड़ियाघर में हिरण की मदमस्त चाल में ठंड से ठहराव आ गया है तो चीतल और सांभर भी ठंड से ठिठुर रहे हैं। मोर, तोता और शुतुरमुर्ग जैसे पक्षी तो घोंसले से बाहर धूप की आस में सुबह जरूर निकलते हैं लेकिन कोहरे के कारण फिर घोंसले में दिनभर दुबके रहना ही श्रेयस्कर समझते हैं।

इस ठंड के कारण चिड़ियाघर घूमने आने वाले दर्शकों को भी काफी इंतजार के बाद भी जानवरों के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। वैसे चिड़ियाघर प्रशासन ने पशु-पक्षियों को सर्दी से बचाने के लिए मुकम्मल व्यवस्था की है।

चिड़ियाघर के एक अधिकारी के मुताबिक बाघ, शेर और भालू सहित अन्य जानवरों के पिंजरों में ब्लोअर लगाए गए हैं। ब्लोअर की गर्मी के कारण बाघ और शेर अपने पिंजरे से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इधर, सांपों के पिंजरों में एक-एक हजार वॉट के बल्ब लगा दिए गए हैं। सांप भी इन बल्बों के नजदीक कुंडली मारकर गर्मी ले रहे हैं।

हाथी, जिराफ और भालू सहित अन्य जानवरों के पिंजरे में पुआल बिछाया गया है जबकि पक्षियों के रहने वाले पिंजरों और घोंसलों में पुआल बिछाकर गर्मी देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा इन पिंजरों पर टाट और प्लास्टिक लगाकर उन्हें सर्द हवा से बचाने का प्रयास किया गया है। पानी में रहने वाले घड़ियाल और मगरमच्छ पानी से बाहर निकलकर धूप का इंतजार कर रहे हैं। दरियाई घोड़ा और गैंडा भी पानी से बाहर निकलकर अपने कमरे में दुबककर ठंड से अपना बचाव कर रहे हैं।

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इधर, खुले में रहने वाले हिरण, चीतल सांभर के लिए मैदान में पिंजरे के अंदर शेड बनाकर उन्हें आसमान से गिरने वाली ओस से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

अधिकारी बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष ठंड में ऐहतियाती कदम उठाए जाते हैं। ठंड से बचाने के लिए पशु-पक्षियों के खान-पान में भी परिवर्तन किया जाता है तथा उन्हें शरीर में गर्मी के लिए विभिन्न तरह की दवाएं दी जाती हैं।

उल्लेखनीय है कि पटना का ‘दिल’ माने जाने वाले 152.95 एकड़ में फैले इस उद्यान में 800 से ज्यादा जानवर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इस प्राणी उद्यान की प्राकृतिक छटा देखने के लिए देश-विदेश के लोग भी यहां पहुंचते हैं। (आईएएनएस)

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