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बच्चों के भोजन के अधिकार के लिए अपना संघर्ष तेज करने का निर्णय

– रोज़ी रोटी अधिकार के छठे राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन तीस कार्यशालाएं और दो प्लीनारियाँ –

रांची: रोज़ी रोटी अधिकार अभियान के छठवें राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन हुई जीवंत चर्चाओं को आगे बढाते हुए आज तीस कार्यशालाएं और दो प्लीनारी सत्र आयोजित किये गये।
शुक्रवार की उद्घाटन प्लीनारी में जन वितरण प्रणाली पर हुए सत्र से यह निष्कर्ष निकला कि (1) राशन के बदले नकद नहीं; (2) राशन लेने के लिए आधार अनिवार्य नहीं हो सकता और (3) जन वितरण प्रणाली में अनाज के साथ दाल और खाद्य तेल भी दिया जाए।
इसके अलावा कृषि में संकट, ज़मीन हड़पने और भोजन के अधिकार पर अधिवेशन के प्रतिभागियों ने निम्न संकल्प लिए: (1) पानी की प्राथमिकता पहले पीने के लिए, फिर पारिवारिक ज़रूरतों के लिए, फिर कृषि और अंत में उद्योग और शहरीकरण के लिए; (2) बीज संप्रभुता और कृषि संप्रभुता को बरकरार रखने के परिप्रेक्ष्य में भोजन के अधिकार को समझा जाए; (3) ज़ोरज़बरदस्ती से भू अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए; (4) कॉरपरेट की दलाली बंद हो; (5) बीटी सरसों के विरोध में हो रहे संघर्ष का समर्थन और (6) वन अधिकार कानून, पेसा और भू सुधार के कानून का प्रभावी अमल हो। दिन के पहले समूह की कार्यशालों में सिमटता लोकतंत्र, सामाजिक क्षेत्र के बजट में कटौती, लोगों का सामाजिक सहायता से बहिष्कार, शिकायत निवारण व जवाबदेही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मध्याहन भोजन के रसोइयों जैसे कर्मियों के अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण, आजीविका, बघार व अन्य शहरी गरीब, टीबी, विकलांगता व मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करना जैसे मुद्दे शामिल किये गये थे। दोपहर के सत्र में जन वितरण प्रणाली, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बच्चों के भोजन के अधिकार, मातृत्व हक व झूलाघर, लिंग आधारित हिंसा, ट्रैफिकिंग, स्थानीय शासन, पंचायती राज व्यवस्था, भोजन के अधिकार के लिए कानूनी कार्रवाई, सूखा, बाढ़, भूख, व्यापार सम्बंधित मुद्दे, जल का अधिकार, आदिम जनजाति समूह, वन उपज का प्रयोग व खाद्य संप्रभुता जैसे मुद्दे शामिल थे।
कार्यशालाओं में इन मुद्दों पर रोज़ी रोटी के अधिकार के सन्दर्भ में बात हुई। इनका संचालन देश के कुछ सबसे जानकार कार्यकर्ताओं व शोधकर्ताओं द्वारा हुआ। सब कार्यशालाओं का समापन प्रस्तावों से हुआ जिनमें उनसे सम्बंधित मुद्दों पर आगे काम करने के लिए कार्य योजना बनाई गई।
बच्चों के भोजन के अधिकार अभियान के प्लीनरी सत्र में देश में कुपोषण व बच्चों के लिए सेवाओं पर चर्चा हुई। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कुपोषण कुछ कम हुआ है और आंगनवाड़ी व मध्याहन भोजन जैसी सेवाओं का कुछ विस्तार हुआ है, पर इनके कार्यान्वयन व गुणवत्ता में अभी भी बहुत कमियाँ हैं। अभियान ने बच्चों के कार्यक्रमों के निजीकरण व व्यावसायीकरण के परिप्रेक्ष्य में बच्चों के भोजन के अधिकार के लिए अपना संघर्ष और तेज़ करने का संकल्प लिया। दूसरा प्लीनारी सत्र महिलाओं के हक़ और भोजन के अधिकार पर था। दिन का समापन सभाजी व अन्य लोगों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ।

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