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प्रयाग कुंभ : दशकों बाद फिर शुरू हुई पंचकोसी और बारह माधव परिक्रमा

Allahabad : प्रयाग की सांस्कृतिक गरिमा और पौराणिक महत्व को पुनः स्थापित करने की दिशा में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों ने कई दशकों से विलुप्तप्राय हो चुकी पंचकोसी परिक्रमा और द्वादश माधव परिक्रमा रविवार को गंगा पूजन के साथ शुरू की. सुबह 4:00 बजे से ही संगम तट पर इस गंगा पूजन तथा परिक्रमा प्रारम्भ करने की तैयारी प्रारंभ हो चुकी थी. सूर्योदय के साथ ही सभी संतों और प्रशासनिक अधिकारियों ने गंगा और त्रिवेणी में स्थित त्रिवेणी माधव का पूजन किया और बारह माधव मंदिरों तथा पंचकोसी परिक्रमा प्रारम्भ की. 

मंडलायुक्त आशीष गोयल ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग में पिछले कई दशकों से विलुप्त होती जा रही पंचकोसी परिक्रमा को पुनः प्रारम्भ करना तथा इसके माध्यम से प्रयाग की प्राचीन सांस्कृतिक गरिमा और पौराणिक महत्व को उजागर करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है. ऐसी मान्यता है कि इलाहाबाद की इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं हैं और वे यहां माधव रूप में विराजमान हैं. भगवान के यहां बारह स्वरूप विद्यमान हैं, जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है. 

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सभी द्वादश माधव मंदिरों को एक परिक्रमा पथ से जोड़ते हुए उन तक सुगम पहुंच के लिए साइनेज एवं सड़क तथा उनके परिसरों में सोलर लाइट, रिटेनिंग वाल, सत्संग हाल, चबूतरे, गेट, शौचालय/स्नानागार, रेलिंग, फर्श के निर्माण, पेयजल, शेड/बेंच आदि का निर्माण कराया जा रहा है. इसके लिए शासन ने 5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है.

सूत्रों ने बताया कि इस बार का कुंभ, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिहाज से एकदम अलग होगा. सरकार ने गंगा पंडाल लगाने की योजना बनाई है. एक पंडाल में 10,000 लोगों के बैठने की क्षमता होगी. आगामी कुंभ मेले को 20 सेक्टर में बांटा जाना प्रस्तावित है.

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मेले में 2000-2000 लोगों की क्षमता वाले 3 सत्संग पंडाल बनेंगे

उन्होंने कहा कि यात्रियों को ठहरने की सुविधा तो यात्री निवास में मिलती थी, लेकिन घाट के पास उन्हें स्नान से पहले और बाद में भरी सर्दी में खुले में ही बैठना पड़ता था. इसे देखते हुए ये नये पंडाल स्थापित करने का फैसला किया गया. उन्होंने बताया कि इसके अलावा, मेले में 2000-2000 लोगों की क्षमता वाले 3 सत्संग पंडाल बनाए जाएंगे. ये पंडाल उत्तरी झूंसी, दक्षिणी झूंसी और अरैल क्षेत्र में स्थापित किए जाएंगे, जहां श्रद्धालु सत्संग के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद ले सकेंगे. उन्होंने कहा कि सभी 20 सेक्टरों में श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए एक-एक यात्री निवास भी बनाया जाना प्रस्तावित है, जहां बिजली, पानी, शौचालय और गद्दे आदि की व्यवस्था होगी. प्रत्येक यात्री निवास की क्षमता 1,000 श्रद्धालुओं की होगी और यह पूरी तरह से निःशुल्क होगा. सूत्रों ने बताया कि इलाहाबाद में अखाड़ों की जमीन पर साधु संतों के ठहरने के लिए कमरे, बाथरूम, शौचालय आदि का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. सरकार ने इसके लिए नौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है.

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झूलते बिजली के तारों को एबीसी कंडक्टर में बदलने का कार्य शुरू

इसके अलावा, पेशवाई मार्गों (जिन मार्गों पर अखाड़ों के साधु संतों की पेशवाई निकलती है) पर झूलते बिजली के तार हटाए जा रहे हैं और खुले तारों को एबीसी कंडक्टर में बदलने का कार्य किया जा रहा है, ताकि पेशवाई के दौरान किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे.
उन्होंने बताया कि आगामी कुंभ में अरैल से फाफामऊ तक 15 किलोमीटर तक अस्थाई घाटों का निर्माण कराया जाएगा. वहीं सरकार तीन पक्के घाटों का निर्माण कार्य पहले ही शुरू कर चुकी है.

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कुंभ मेले के दौरान 20 लाख कल्पवासियों के गंगा के तट पर रहने की संभावना

मेले के दौरान करीब 20 लाख कल्पवासियों के गंगा के तट पर रहने की संभावना है और 10 लाख से अधिक विदेशियों के आने की संभावना है. विदेशी लोगों के ठहरने के लिए अरैल में एक टेंट सिटी बसाई जाएगी. हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी कुंभ मेले में 12 से 15 करोड़ लोगों के आने की संभावना जताई थी और इस मेले के सफल आयोजन के लिए इलाहाबाद के साथ ही प्रदेश के लोगों से आतिथ्य सत्कार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ने की अपील की थी.

कुंभ को यूनेस्को ने दुनिया की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया

कुंभ को यूनेस्को ने दुनिया की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है और यह माना है कि यह धरती पर होने वाला सबसे बड़ा शांतिपूर्ण धार्मिक सम्मेलन है, जिसमें विभिन्न वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के भाग लेते हैं. एक धार्मिक आयोजन के तौर पर कुंभ में जैसी सहिष्णुता और समायोजन नजर आता है, वह पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है. उम्मीद करनी चाहिए कि कुंभ के प्रति दुनिया का यह विश्वास और आस्था इसी तरह बनी रहेगी.

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