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पॉली बैग पर बैन से दो सौ करोड़ का नुकसान, पांच हजार व्यापारियों पर सीधा असर (देखें वीडियो)

मो. असगर खान

Ranchi, 6 September: झारखंड में आज से पॉली बैग के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. कल ही इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गयी थी. सरकार के इस फैसले का सबसे प्रतिकुल असर राज्य में इसके थोक विक्रेताओं और पॉलिथीन निर्माणकर्ताओं पर पड़ने के आसार हैं. राज्य भर में पॉली बैग के कारोबार से लगभग ढाई लाख लोग जुड़े हुए हैं. पांच हजार पॉली बैग व्यापारी फुल टाईम इसके करोबार में लिप्त हैं, जिनको पूर्ण रूप से बैन होने के बाद 200 करोड़ रूपये का नुकसान हो सकता.

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सरकार के निर्णय से लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर असर 

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रांची के अपर बाजार समेत, विभिन्न हिस्सों में इसके 150 थोक विक्रता दुकानदार हैं, जबकि राज्य भर में 40 हजार लोग इस तरह के प्लास्टिक सामग्री की हॉकरिंग करते हैं. ऐसे में झारखंड सरकार के द्वारा पॉली बैग पर बैन का निर्णय लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर डालेगा. वहीं रोजमर्रा की जिंदागी में झारखंड वासियों को भी अब इसके इस्तेमाल को लेकर मुस्तैद रहना होगा. मॉल, शॉप, किराना दुकानों पर घर से ही कपड़े के झोल या थैले लेकर आना होगा.

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20 करोड़ का माल है मार्केट में स्टॉक
झारखंड प्लास्टिक एसोशिएशन की माने तो 150 करोड़ से उपर की राशि के माल मार्केट में बकाया है जबकि इसके कारोबारियों के पास लगभग 20 करोड़ के आस-पास का प्रोडक्ट है. सरकार के द्वारा किए गए बैन से इसके कारोबारियों पर 200 करोड़ के नुकसान का सीधा असर पड़ेगा.

आधी आबादी करती पतले प्लास्टिक का प्रयोग
पतले प्लास्टिक का इस्तेमाल राज्य की आधे से अधिक आबादी करती है. डेली यूज के लिए खाद्ध सामग्री से लेकर गारमेंट्स तक के समान की खरीदारी लोग इसी पतले प्लास्टिक के पॉली बैग में करते हैं.

राज्य में हैं प्लास्टिक की दस बड़ी फैक्ट्रियां 
झारखंड में पॉली बैग का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है. राज्य में इसके उत्पादन के लिए दस बड़े कारखाने हैं. जिनमें रांची में कोकर के प्रसाद प्लास्टिक , पिस्का मोड़ के ब्लू बर्ड, जलान के रोड इंडिया पॉलिथीन, चर्च रोड के फ्रेंड पॉलिथीन और राशि पॉली पैक्ट टाटा इसके उत्पादन में अग्रणी हैं. घरेलु स्तर पर भी लगभग सौ की संख्या में इसके छोट उत्पादनकर्ता हैं. झारखंड छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और बंगाल को भी प्लास्टिक प्रोडक्ट का निर्यात करता है.

1983 में पहली बार बैन किया गया था पॉली प्रोडक्ट
1983 में पहली बार केंद्र सरकार ने प्लास्टिक के थैले को पूर्ण रुप से बैन कर दिया था. जिसे शालीमार ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट ने इसपर सुनवाई करते पूर्ण रूप से बैन नहीं लगाने की सलाह दी और राज्य को इसी अनुरूप काम करने को कहा गया. इसके बाद कई राज्यों में 50 माइक्रोन से कम के ही प्लास्टिक के थैले पर बैन लगाया गया.

50 माइक्रोन से उपर के प्रोडक्ट पर मिले छूट

झारखंड प्लास्टिक एसोसिएशन के सदस्य और संजय प्लास्टिक सेंटर के मालिक पॉली बैग के बैन पर कहते हैं कि सरकार का फैसला ठीक है, कानून को सख्ती से लागू भी किया जाए. लेकिन 50 माइक्रोन या उससे उपर के पॉली बैग की बिक्री पर छूट दी जाए. दूसरे राज्य में ऐसा ही नियम है. जहां कही भी सरकार ने इसपर रोक लगाया, वहां के प्लास्टिक कारोबारी कोर्ट गए और निर्णय उनके पक्ष में आया. सरकार इस पर विचार करे. अन्यथा कोर्ट से गुहार लगाने के अलावा हमलोगों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा.

पूर्ण बैन से सड़क पर आ जायेंगे हम 

वहीं अपर बजार स्थित प्लास्टिक करोबारी राजीव छाबरा कहते हैं कि हमलोग का सबकुछ इस धंधे में लगा हुआ है. पहले भी 2006 में 20 माइक्रोन से कम के पॉली बैग पर प्रतिबंध लगा, फिर 2011 में उसे 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया, लेकिन पूर्ण रुप से बैन हमलोगों को सड़क पर ला देगा. धंधा ठप हो जायेगा भूखमरी की नौबत आ जायेगी. एसोसिएशन जल्द ही इस निर्णय को लेकर बैठक कर सरकार से बात करेगा.

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