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पत्नी को छोड़कर भागने वाले NRI दूल्हों पर नकेल कसने को लेकर तैयारी कर रही सरकार, घोषित होगें भगोड़े

New Delhi : बेटी की शादी को लेकर हर मां-बाप के दिल में हजारों अरमान होते हैं. पैरेंटस अपनी लाडली की पढ़ायी-लिखायी से लेकर बेटी की शादी तक कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. बेटी को अधिक खुश और सुखी देखने की चाह में पैरेंटस एनआरआई लड़कों से अपनी बेटी की शादी करा रहे हैं. जिसके कारण पिछले कुछ सालों में एनआरआई लड़कों की मांग बढ़ गयी है. लेकिन शादी के बाद इन लड़कियों की कहानी ही कुछ और होती है. कई ऐसे मामले देखे गये हैं जिसमें एनआरआई दूल्हें शादी के बाद अपनी पत्नी को भारत में ही छोड़कर भाग जाते है. बाद में ले जाने का वादा करके चले जाते हैं और फिर कभी वापस नहीं लौटते हैं. लेकिन इस तरह के मामले को लेकर केंद्र सरकार अब गंभीर होती नजर आ रही है. इसको लेकर केंद्र सरकार ने सख्ती की तैयारी कर ली है. सरकार कोड ऑफ क्रिमिनल प्रॉसिजर (सीआरपीसी) में बदलाव की तैयारी में है. अपनी पत्नी को भारत में छोड़कर भागने वालों पर और कोर्ट के द्वारा समन के बाद भी तीन बार पेश नहीं होने पर उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया जायेगा. साथ ही भारत में जो भी उस दूल्हे और उसके परिवार की संपत्ति है उसे भी सील किया जा सकता है. विदेश मंत्रालय ने एनआरआई दूल्हों पर नकेल कसने के लिए कानून में बदलाव के लिए कानून मंत्रालय को पत्र भी लिखा है.

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विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर भगोड़ों की लिस्ट में शामिल होंगे भागने वाले दूल्हे

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महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कहा कि ऐसा कई बार देखने को मिला है कि विदेश में बस गये पति अपनी पत्नी को देश में ही छोड़ देते हैं. उनपर छोड़ने के आरोप लगाये जाते है और इसे लेकर कोर्ट के द्वारा नोटिस जारी करने के बाद भी पेशी के लिये वो हाजिर नहीं होते हैं. लेकिन अब ऐसा करने पर उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया जायेगा और विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर उनका नाम भगोड़ों की लिस्ट में शामिल कर दिया जायेगा.

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बाल यौन शोषण रोकने पर भी उठाये गये सख्त कदम

इस मामले के साथ-साथ केंद्रीय बाल और महिला विकास मंत्रालय ने बाल यौन शोषण रोकने के लिए भी कुछ सख्त कदम उठाये हैं. सीआरपीसी में कुछ बदलाव किये गये हैं जिसके जरिये यौन शोषण के एक साल के बाद भी एफआईआर दर्ज करायी जा सकेगी. साथ ही अगर बचपन में किसी के साथ यौन शोषण हुआ है और अब पीड़ित बालिग है तब भी केस दर्ज कराया जा सकेगा. मेनका गांधी ने बाल यौन शोषण कानून में बदलाव के बारे में कहा कि कानून में बदलाव का उद्देश्य है कि बचपन में हुये हादसे के बाद अगर आप बालिग भी हो गये हैं तो आपको न्याय का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कुछ अपने रिस्क भी हो सकते हैं और झूठे केस की आशंकाओं पर भी विचार किया गया. लेकिन हमारा उद्देश्य है कि बाल यौन शोषण के शिकार सभी पीड़ितों को न्याय मिले.

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एनआरआई लड़कों से शादी करने पर कई बार लड़कियां होती है अत्याचार का शिकार

एक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि हर आठ घंटे में विदेश में रह रही बेटियों के साथ अत्याचार हो रहा है. इस रिपोर्ट के अनुसार ये बेटियां अपने पैरेंट्स से मदद के लिये फोन करती हैं. अनेक वजहों से ये लड़कियां होती है अत्याचार की शिकार. इसका अदांजा भी नहीं लगाया जा सकता है. रिपोर्ट में इन कारणों में पति द्वारा पत्नी को छोड़ देना, बुरा बर्ताव करना और शारीरिक प्रताड़ना देना आदि को रखा गया है. गौरतलब है कि एक जनवरी 2015 से लेकर 30 नवबंर 2017 के बीच विदेश मंत्रालय को ऐसी 3,328 शिकायतें मिली हैं. इन शिकायतों के आधार पर की गयी पड़ताल में बेटी ने एक दिन में तीन से अधिक बार और फिर रात में अपने पैरेंट्स को फोन किया था.

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इन शहरों की लड़कियां होती हैं सबसे ज्यादा शिकार

रिपोर्ट में सामने आया है कि ऐसी महिलाओं में सबसे अधिक पंजाब, आंध्र-तेलंगाना व गुजरात से हैं. सार्वजनिक सहयोग और बाल विकास ने अपनी रिपोर्ट में भी इन कारणों की पुष्टि की है. अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास में काम कर चुकी एक भारतीय महिला के अनुसार एनआरआई लड़के अपने माता-पिता को खुश करने के लिये भारत आते हैं और अपने परिवार वालों की खुशी के लिये उनकी मर्जी से शादी कर लेते हैं और वापस लौटने के बाद वो अपनी पत्नियों को अपने उपर थोपा हुआ समझने लगते हैं. उसके बाद से ही इन युवतियों की अत्याचार की कहानी शुरु हो जाती है.

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