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न्यायपूर्ण विकास और जन कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्य सचिव

– राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने की मुख्य सचिव और राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोगात्मक व्यवहार की तारीफ़ –

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रांची: बृहस्पतिवार 8 सितंबर, 2016 को रांची के धुर्वा स्थित न्यायिक अकादमी परिसर में राज्य सरकार के आला अधिकारियों की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम के साथ बैठक आयोजित की गयी। बैठक में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को बताया कि राज्य सरकार न्यायपूर्ण विकास और जन कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री स्वयं गांव गांव जाकर ग्रामीणों के साथ योजना बनाओ अभियान में शामिल हुए और ग्रामीणों के सुझावों को राज्य के बजट में शामिल किया श्रीमती वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार पलायन, बाल मजदूरी, बंधुवा मजदूरी को रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि यहां की बेटियां रोजगार की तलाश में बाहर न जाएं, उन्हें यहीं पर काम उपलब्ध कराया जाएगा। पलायन कर चुकी लड़कियों की घर वापसी के लिए दिल्ली स्थित झारखंड भवन में टॉल फ्री नंबर प्रारंभ कराया गया है। साथ ही रोजगार के लिए अपनी बच्चियों को दूसरे राज्यों में भेजने वाले परिजनों को भी पत्र के माध्यम से सूचित किया जा रहा है कि वे अपनी बच्चियों को वापस बुला लें, उन्हें यहीं रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। श्रीमती वर्मा ने आयोग को सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों से अवगत कराया।
श्रीमती वर्मा ने आयोग को बताया कि फ्लोराइड युक्त पानी से मुक्ति के लिए राज्य सरकार दो हजार करोड की लागत से पाइपलाइन के जरिए प्रभावित लोगों को पेयजल उपलब्ध करायेगी। स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोडकर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का प्रयास हो रहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से 1.72 लाख ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं। श्रीमती वर्मा ने कहा कि देश के कुल उत्पादन का 60प्रतिशत तसर उत्पादन झारखण्ड में होता है। इसमें इजाफा कैसे हो और इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को कैसे जोड़ा जा सके, सरकार इसपर काम कर रही है।
इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एचएल दत्तू ने कहा कि झारखण्ड में आयोजित शिविर बैठक और खुली सुनवाई का मुख्य उद्देश्य मानवाधिकार की रक्षा और इसे सुनिश्चित करने के लिए जरुरी प्रशासनिक प्रयासों को गति देना है| उन्होंने कहा कि दो दिनों के इस कार्यक्रम में राज्य सरकार से प्राप्त पूर्ण सहयोग और मुख्य सचिव श्रीमती राजबाला वर्मा के नेतृत्व में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोगात्मक रवैये से आयोग इस उद्देश्य की पूर्ति में काफी हद तक सफल रहा है| कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मामलों की सुनवाई और स्वयं सेवी संस्थाओं से हुई बातचीत में बंधुवा मजदूरी, बाल श्रम, विस्थापन, मानव तस्करी, पलायन से संबंधित मामले प्रकाश में आए और आयोग के इनसे सम्बन्धित निर्देशों पर तत्परता पूर्वक अमल का भरोसा राज्य के प्रशासनिक तंत्र द्वारा दिया गया|
श्री दत्तू ने प्रशासनिक अधिकारियों से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा प्रेषित नोटिसों पर समय सीमा के भीतर विधिसम्मत कार्रवाई का आग्रह किया| उन्होंने कहा कि आयोग स्वतः संज्ञान अथवा सूचित किए गए प्रत्येक मामले की तह तक जाकर कमजोर और पीड़ित वर्ग को न्याय दिलाना चाहता है और यह काम प्रशासनिक तंत्र के सहयोग से ही संभव है| श्री दत्तू ने कहा कि कोयला खदानों में बाल मजदूरी और भूगर्भ जल में फलोराईड की मौजूदगी के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाने की जरुरत है|
इस अवसर पर स्वास्थ्य सचिव, समाज कल्याण सचिव व पुलिस महानिदेशक ने सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं और लाभान्वित होने वालों की जानकारी आयोग का दी। बैठक में सदस्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एससी सिन्हा, जस्टिस सी जोसेफ, जस्टिस डी मुरूगेषन, अपर मुख्य सचिव गृह एनएन पाण्डेय, पुलिस महानिदेशक डीके पाण्डेय, मुख्यमंत्री के सचिव सुनील वर्णवाल समेत विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव व सचिव मौजूद थे।

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