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धर्मांतरण पर राज्यसभा दिन भर के लिए स्थगित

नई दिल्ली : धर्मातरण और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों के बयानों को लेकर राज्यसभा में लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी हंगामा जारी रहा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित होने के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष इस बात से भी नाराज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में बयान दिया, लेकिन वह सदन में नहीं आए।

तृणमूल सांसद डेरेक ओब्रीन ने कहा, “क्या प्रधानमंत्री को इस सदन में आने के लिए वीजा की जरूरत है?”

संसदीय मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस बयान को ‘अस्वीकार्य’ करार दिया।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस बीच कहा, “जब प्रधानमंत्री संसद में हैं, तो वह विपक्ष की मांग मान कर सदन में क्यों नहीं आ रहे।”

सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर चर्चा सदन के कामकाज की सूची में शामिल था, लेकिन विपक्ष ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति के बगैर चर्चा से इंकार कर दिया।

ऊपरी सदन में लगातार स्थगन, नाराजगी, आरोप-प्रत्यारोप देखा गया। सत्ता पक्ष व विपक्ष ने एक-दूसरे पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए।

सभापति एम.हामिद अंसारी ने कांग्रेस सदस्य वी.हनुमंत राव को तब दिनभर के लिए सदन से बाहर कर दिया, जब वह सभापति के आसन के पास नारेबाजी कर रहे थे।

पूर्वाह्न 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता नरेश अग्रवाल ने धर्मातरण का मुद्दा उठाया।

अग्रवाल ने प्रधानमंत्री द्वारा पार्टी सदस्यों को ‘लक्ष्मण रेखा’ न लांघने के संबंध में दी गई हिदायत का उल्लेख करते हुए कहा, “हमने अखबारों में पढ़ा है कि भाजपा की संसदीय दल की बैठक में कुछ नीतिगत निर्णय लिए गए हैं।”

उन्होंने कहा, “यदि उनके मंत्री कुछ गलत कर रहे हैं, तो सदन में बयान देना उनकी जिम्मेदारी है।”

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हालांकि, इस आरोप को खारिज कर दिया कि कोई नीतिगत निर्णय लिया गया है।

जेटली ने कहा, “प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान किसी तरह का नीतिगत निर्णय नहीं लिया है। मेरे सामने व्यवस्था का सवाल है। लेकिन व्यवस्था के प्रश्न की आड़ में क्या नरेश अग्रवाल हर दिन अव्यवस्था का सवाल उठा सकते हैं।”

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इसी मुद्दे पर व्यवस्था का प्रश्न खड़ा किया।

तिवारी ने कहा, “हम प्रधानमंत्री को सिर्फ यह बता रहे हैं कि आपके लोग देश में असहिष्णुता फैला रहे हैं। अगर वह इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि कुछ लोग लक्ष्मण रेखा लांघ रहे हैं, तो वह बताएं कि कौन-सी लक्ष्मण रेखा लांघी जा रही है।”

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि वह अव्यवस्था से जुड़ा एक मुद्दा उठाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या प्रधानमंत्री सदन में आएंगे, ताकि हम चर्चा कर सकें। क्या प्रधानमंत्री यहां आना चाहेंगे। सदन के बाहर भाषण देने के बदले वह यहां आएं और सदन में बोलें।”

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा।

शर्मा ने कहा, “जब कभी विपक्षी नेता बोलना चाहते हैं, सत्तारूढ़ पार्टी हमेशा सदन में बाधा उत्पन्न करती है।”

इसके बाद उपसभापति पी.जे.कुरियन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सदन की बैठक फिर शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों ने प्रश्नकाल फिर नहीं चलने दिया।

अग्रवाल ने सभापति से अनुरोध किया कि अन्य कामकाज स्थगित करने से संबंधित उनके नोटिस को स्वीकार किया जाए और चर्चा शुरू हो। हालांकि, सभापति एम. हामिद अंसारी ने नोटिस को अस्वीकार कर दिया।

अग्रवाल के बार-बार अनुरोध करने पर सभापति ने गुस्से में कहा, “आपके अनुसार सदन के बाकी सभी कामकाज क्यों स्थगित किए जाएं।”

सभापति ने सीट छोड़ कर गलियारे में खड़े सदस्यों को फटकार लगाई।

हंगामा जारी रहने पर ऊपरी सदन की कार्यवाही फिर 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।

सभापति ने एकबार फिर कहा कि चर्चा तय है, लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री को बुलाने की मांग पर अड़ा रहा।

अंसारी ने कहा, “आप अपने पक्ष का ख्याल रखें, उन्हें अपने पक्ष का ख्याल रखने दें। सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी है।”

विपक्ष हालांकि, राजी नहीं हुआ और सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर यही दृश्य देखा गया और विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति के बिना चर्चा से इंकार कर दिया।

करीब 40 मिनट तक सत्ता और विपक्ष के बीच गर्मागर्म बहस चलने के बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष मुसलमानों को हिंदू बनाने की हालिया खबरों और सांसद योगी आदित्यनाथ के धर्मातरण कार्यक्रम से संबंधित बयान के खिलाफ विरोध जता रहा है।

आदित्यनाथ ने एक बयान में कहा था कि इसमें कोई बुराई नहीं है अगर लोग अपनी इच्छा से दोबारा हिंदू धर्म अपनाना चाहते हैं। आईएएनएस

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