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झारखंड में धर्म स्वतंत्र कानून लागू, जबरन धर्मांतरण पर होगी सजा

News Wing

Ranchi, 20September:  झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक (फ्रीडम ऑफ रेलिजन बिल), 2017 पर पिछले दिनों राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार ने इसे अधिसूचित कर दिया है. विधि विभाग ने इस संबंध में 11 सितंबर को अधिसूचना जारी की. इसी के साथ यह कानून के रूप में राज्य में लागू हो गया है.

जबरन धर्मांतरण गैर जमानती अपराध माना जाएगा

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इस अधिनियम के तहत झारखंड में अब किसी भी व्यक्ति को बलपूर्वक, कपट से या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगा. ऐसा कृत्य संज्ञेय व गैर जमानती अपराध माना जाएगा. ऐसे मामलों की जांच पुलिस निरीक्षक से निम्न पद के पुलिस अधिकारियों द्वारा नहीं की जाएगी.

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50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगेगा

साथ ही, आरोप साबित होने पर ऐसे मामलों में तीन वर्षों तक की जेल तथा 50 हजार रुपये का जुर्माना हो सकेगा. अगर धर्म परिवर्तन किसी नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का किया गया हो तो चार वर्षों की जेल व एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा.

धर्म परिवर्तन के लिए लेनी होगी अनुमति

यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की इच्छा रखता है तो उसे इसके लिए उपायुक्त से सहमति लेनी होगी. ऐसा नहीं करने पर उसे एक वर्ष तक की जेल या पांच हजार रुपये का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. ऐसे मामलों के अभियोजन पदाधिकारी संबंधित जिले के उपायुक्त या उनके द्वारा नामित एसडीओ स्तर के पदाधिकारी होंगे.

सरकार बनाएगी नियमावली

इस कानून को पूरी तरह लागू कराने के लिए राज्य सरकार इससे संबंधित नियमावली भी बनाएगी. अधिनियम में इसका भी प्रावधान किया गया है.

भूमि अर्जन विधेयक पर ली जाएगी राष्ट्रपति की स्वीकृति

भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुन‌र्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार संशोधन विधेयक, 2017 पर राष्ट्रपति की स्वीकृति ली जाएगी. राज्यपाल ने इस विधेयक पर भी अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है. बताया जाता है कि राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए विधेयक केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया गया है. इसमें विकास योजनाओं के लिए जमीन लेने पर सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन नहीं कराने का प्रावधान किया गया है.

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