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झारखंड : मानव तस्करी में 110 फीसदी की बढ़ोत्तरी

|| सांसद परिमल नथवाणी को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का प्रत्युत्तर ||

रांची : झारखंड में मानव तस्करी में साल 2014 में अप्रत्याशित रूप में 110 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य में वर्ष 2014 में मानव तस्करी के 78 मामले दर्ज किये गये हैं, जिसकी संख्या 2013 में मात्र 37 थी। केंद्र सरकार ने मानव तस्करी-रोधी कानून लागू करने के अलावा देश के 225 जिलों में मानव तस्करी-रोधी इकाइयां स्थापित की हैं, जिनमें से आठ इकाइयां झारखंड राज्य में हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्नी श्री हरिभाई चौधरी ने बुधवार (चार मार्च, 2015) को राज्य सभा में सांसद श्री परिमल नथवाणी के प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी।

मंत्री ने यह भी बताया कि राट्रीय अपराध रिकार्ड ब्युरो ; (एनसीआरबी) से प्राप्त सूचना के अनुसार देश में मानव तस्करी अपराध की संख्या 2013 में 3,940 थी जो 2014 में बढ़कर 6,333 हो गई। अर्थात, देश में मानव तस्करी के अपराधों की संख्या में 60.74 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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देश में मानव तस्करी अपराधों की संख्या 2013 में 2012 की तुलना में साधारण रूप से बढ़ी थी, परंतु इसी साल झारखंड में मानव तस्करी के अपराधों की संख्या में कमी आयी थी।

एनसीआरबी के अनुसार, देश में मानव तस्करी अपराधों की संख्या 2012 में 3554 से 10.86 प्रतिशत बढ़कर 2013 में 3940 हुई। किन्तु झारखंड में यह संख्या 2012 में 43 थी जो कम होकर 2013 में 37 हुई। यह करीब 14 प्रतिशत कमी को दर्शाता है। ऐसा सदन में रखे गए प्रत्युत्तर में बताया गया।

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सांसद श्री नथवाणी यह जानना चाहते थे कि देश में और खासकर झारखंड में मानव तस्करी में कितनी बढ़ोतरी हुई है और सरकार ने मानव तस्करी रोकने के लिए क्या कदम उठाये हैं? इसके जवाब में मंत्री ने यह भी बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रलय उज्जवला नामक योजना का कार्यान्वयन कर रहा है, जो तस्करी पर रोक एवं बचाव, तस्करी पीड़ितों के पुनर्वास, एकीकरण और प्रत्यावर्तन के लिए एक समग्र योजना है।

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