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झारखंड खान मजदूर सभा ने राजभवन के समक्ष दिया धरना, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

Ranchi : पलामू जिला के चैनपुर प्रखंड स्थित सोकरा ग्रेफाईट माइंस के खदानों को चालू करने और छटनीग्रस्त 455 मजदूरों के बकाया मजदूरी के भुगतान को लेकर राजभवन के समक्ष धरना दिया गया.  धरना को संबोधित करते हुए सुदेश्वर सिंह ने कहा कि माइंस बंद होने का कारण खान मालिक के द्वारा सरकार को रॉयल्टी नहीं दिया जाना है. रॉयल्टी नहीं देने के कारण मजदूरों को मजदूरी का भुगतान किए बगैर खान को बंद कर दिया गया. सरकार ने गुप्तेश्वर प्रसाद सिंह के नाम से आवंटित खनन पट्टा रद्द कर दिया. खनन पट्टा रद्द किये जाने के बाद सरकार ने सोकरा माइंस की जांच भू-तत्व विशेषज्ञों से करायी. जांच में पता चला कि सोकरा माइंस से निकलने वाला ग्रेफाईट एशिया में मिलने वाले ग्रेफाइट में से सबसे उत्तम किस्म का है. जांच रिपोर्ट के बाद सरकार को इस खदान का फिर से शुरू करना चाहिए.

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मजदूरों के एक करोड़ 27 लाख रुपये का नहीं हुआ भुगतान

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वक्ताओं ने कहा कि माइंस बंद होने के कारण मजदूरों का एक करोड़ 27 लाख रुपये का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है, जबकि इस संबंध में 3 मार्च 2015 को विभागीय मंत्री के द्वारा मजदूरी भुगतान करने का निर्देश भी दिया जा चुका है, लेकिन अब तक मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाना काफी गंभीर मामला बनता है. वहीं इस संबंध में सीजीएम पलामू के द्वारा बकाया राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है, जिसकी अवहेलना आज तक की जा रही है.

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रघुवर दास के आश्वासन के बाद भी मजदूरों के बकाया राशि का नहीं हुआ भुगतान

16 जून 2015 को मुख्यमंत्री के पलामू प्रवास के दौरान चैनपुर के किन्नी गांव के सभा में सोकरा ग्रेफाईट माइंस को चालू करने की घोषणा के बाद भी आज तक माइंस को चालू नहीं किया जा सका. वहीं दूसरी ओर 15 मार्च 2016 को झारखंड खान मजदूर सभा के द्वारा मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री के द्वारा कहा गया था कि हमें 4 दिनों का समय दिया जाए, क्योंकि 4 दिन विधानसभा सत्र बाकी है. सभी पदाधिकारी और मंत्रीगण व्यस्त रहेंगे. विधानसभा सत्र के बाद भुगतान की प्रक्रिया पूरी करा दी जाएगी. लेकिन आज तक  न तो खदान खुले और न ही मजदूरी का भुगतान हुआ. सरकार के रवैया को देखते हुए हम सभी झारखंड खान मजदूर सभा के सदस्य एवं तमाम मजदूर आंदोलन करने के लिए विवश हैं. धरना के अन्त में  सभा के द्वारा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा की गई और राज्यपाल को ज्ञापन सौपा गया.

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