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जनजातीय तरीकों से दूर करें तनाव

|| मोहम्मद शफीक ||
हैदराबाद, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)| लोगों के जीवन में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसके पीछे कई तरह के सामाजिक एवं आर्थिक कारक हैं। लेकिन इन्हें दूर किया जा सकता है और वो भी जनजातीय तरीकों से। ताली बजाना, मंत्रोच्चार ऐसी ही कुछ तरीके हैं।

न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग (एनएलपी) तथा जेन मेडिटेशन (जेडईएनएलपी) के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध प्रशिक्षक और तनाव दूर करने का गुर सिखाने वाले मुरली मेनन का दावा है कि जनजातीय आबादी के तरीकों को अपनाकर मानसिक तनाव दूर किया जा सकता है और शांति प्राप्त की जा सकती है।

मेनन का मानना है कि महंगाई बढ़ने और आय में वृद्धि नहीं हो पाने के कारण लोगों में आर्थिक तनाव बढ़ रहा है। इसी तरह काम के घंटे बढ़ जाने के कारण लोगों को शारीरिक तनाव हो रहा है। लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं, जिसके कारण उनमें मानसिक तनाव बढ़ रहा है। वे प्रार्थना के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, जिसके कारण उनमें आध्यात्मिक तनाव बढ़ रहा है। इन्हें जनजातीय तरीकों को अपनाकर दूर किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “तनाव पर नियंत्रण पाने के कई साधारण तरीके हैं। उदाहरण के लिए, आप ताली बजाकर शारीरिक तनाव और मंत्रोच्चार कर आध्यात्मिक तनाव दूर कर सकते हैं।”

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उनका यह भी कहना है कि जो लोग बेहतर खानपान लेते हैं, ईश्वर की आराधना करते हैं, परिवार के साथ रहते हैं, अवकाश पर आराम करते हैं और केवल वर्तमान के बारे में सोचते हैं, वे तनावमुक्त होते हैं।

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देश के साथ-साथ तिब्बत, नेपाल, कम्बोडिया, वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, लाओस तथा चीन के विभिन्न हिस्सों में जनजातीय आबादी के साथ रह चुके मेनन ने आईएएनएस से कहा, “जनजातीय समुदाय के लोगों को गलत समझा गया है। हर कोई सोचता है कि इस समुदाय के लोग उन्नत नहीं है। लेकिन उनमें जिस तकनीक को मैंने देखा है, वे आधुनिक फैक्ट्रियों से कहीं अधिक उन्नत व प्रभावी हैं।”

मेनन ने एनएलपी में सर्टिफिकेट कोर्स किया और जेडईएनएलपी जेन मेडिटेशन तथा एनएलपी का ही सम्मिलित रूप है। पिछले 15 वर्षो में करीब 9,000 लोगों ने मेनन के कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जिनमें से अधिकतर कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मध्यम स्तर के प्रबंधक थे। स्कूल शिक्षक, छात्र, पेशेवरों तथा गृहणियों ने भी तनाव दूर करने के लिए उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

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