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चीन, भारत और अमेरिका में बढ़ी असमानता: आईएमएफ

News Wing
Washington, 12 October: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने आज कहा कि विश्वभर में असमानता में तेज गिरावट के बावजूद अमेरिका, चीन और भारत में उसके स्तर में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति देखी गई है.

शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रगति पर दिया जा रहा जोर

आईएमएफ ने कहा कि हाल के वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रगति पर जोर दिया गया है लेकिन इसके बावजूद कई देशों में जनसंख्या के अलग अलग आय समूहों के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में अंतराल बना हुआ है. इनमें विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं.

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वैश्विक असमानता में हुई गिरावट

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आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के निदेशक विटोर गैस्पर ने वार्षिक वित्तीय निगरानी रिपोर्ट जारी करने के मौके पर संवाददाताओं से कहा कि यदि कोई पूरे विश्व में नागरिकों पर ध्यान दें तो यह पाया जाएगा कि वैश्विक असमानता में गिरावट हुई है और यह 19वीं सदी की शुरूआत के बाद से होने वाली वृद्धि की तुलना में एक परिवर्तन वाला रूख है. वहीं इसके विपरीत यदि कोई असमानता पर देश वार गौर करे तो यह स्पष्ट हो जाता है कि विश्व में अधिकतर लोग ऐसे देशों में रहते हैं जहां असमानता बढ़ी है.

असमानता पर ध्यान देना जरुरी

उन्होंने कहा कि यह जोर देना जरूरी है कि विश्व के बड़े देशों चीन, भारत और अमेरिका में असमानता बढ़ी है.

भारत में कमजोर बैंकों व कंपनियों से चिंतित आईएमएफ

वहीं दूसरी ओर आईएमएफ ने भारत में कमजोर बैंकों व कंपनियों के मेल पर चिंता जताई है. कोष का कहना है कि इस मेल से भारत प्रतिकूल ​वैश्विक वित्तीय हालात में प्रभावित हो सकता है.

पूंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर

इसके साथ ही आईएमएफ ने सार्वजनिक बैंकों में अच्छा पूंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाने पर जोर दिया है.

असुरक्षित है भारतीय बैंकिग क्षेत्र

संस्थान ने एक ताजा अध्ययन के हवाले से कहा है कि कम लाभप्रदता व फंसे कर्ज की बड़ी समस्या के मद्देनजर भारतीय बैंकिग क्षेत्र असुरक्षित या संवेदी है.

जोखिम में भारतीय कंपनियां

आईएमएफ के वित्तीय सलाहकार तोबियास एड्रियन ने कहा कि हमने पाया है कि भारतीय कंपनियों भी बड़े जोखिम में हैं. इसलिए कमजोर बैंकों व कमजोर कारपोरेट का यह मेल प्रतिकूल वैश्विक वित्तीय स्थिति में भारत को जोखिमपूर्ण बनाता है.

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