Uncategorized

कैग रिपोर्ट आते ही फिर घिरे शिवराज

भोपाल: नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) को लेकर उठे सवालों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक बार विवाद के केंद्र में ला दिया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कैग रिपोर्ट ने 2004 से 2014 के बीच के दस सालों की व्यापमं की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार को निशाने पर लिया है।

वैसे तो व्यापमं लगभग 1970 से अस्तित्व में है, मगर यह सुर्खियों में वर्ष 2013 में तब आया, जब इंदौर में पीएमटी परीक्षा में एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। उसके बाद से परत दर परत खुलती गई। सरकार के मंत्री से लेकर बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए और उन्हें जेल के सींखचों के पीछे जाना पड़ा। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी छींटे कम नहीं पड़े।

कैग की रिपोर्ट कहती है कि व्यापम में ऐसे अधिकारियों की सेवाएं ली गई, जिन पर आरोप लगे और प्रमाणित भी हुए। यह सब नियुक्तियां तत्कालीन मंत्रियों की हस्तक्षेप के चलते हुईं। रिपोर्ट सीधे तौर पर यह इशारा करती है कि गड़बड़ियों में लिप्त अफसरों को सरकार का संरक्षण मिला। इतना ही नहीं, यह बात गौर करने वाली है कि जिन अफसरों का कैग की रिपोर्ट में जिक्र है, उनमें से कई अफसर व्यापमं घोटाला उजागर होने के बाद जेल भी गए।

ram janam hospital
Catalyst IAS

कैग की रिपोर्ट में सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने की बात भी कही गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि व्यापम सिर्फ प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करता था। वर्ष 2004 के बाद भर्ती परीक्षाएं आयोजित करने लगा। उसके पास कोई विशेषज्ञ नहीं था और इसके लिए मप्र लेाकसेवा आयोग अथवा अन्य एजेंसी से परामर्श लेना भी उचित नहीं समझा गया। इतना ही नहीं यह जानकारी तकनीकी शिक्षा विभाग को भी नहीं दी गई।

The Royal’s
Sanjeevani

यह बताना लाजिमी होगा कि वर्ष 2005 से 2015 के मध्य व्यापम ने 90 भर्ती परीक्षाएं आयोजित कीं, जिसके जरिए 80 हजार से ज्यादा पद भरे गए। इन परीक्षाओं में 86 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी सम्मिलित हुए।

कैग रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने तो यहां तक कह दिया है कि अब उन्हें मुख्यमंत्री चौहान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। उनका कहना है कि इस रिपोर्ट से साबित हो गया है कि जो गड़बड़ियां हुई हैं, उस काल के मुख्यमंत्री चौहान ही हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व विधायक पारस सखलेचा ने कहा कि वर्तमान सरकार उन सारे लोगों को बचाने में लगी है, जिन पर आरोप है। व्यापमं में सबसे ज्यादा घोटाले तब हुए जब चिकित्सा शिक्षा मंत्री का प्रभार मुख्यमंत्री चौहान के पास था।

आश्चर्य में डालने वाली बात यह है कि व्यापम घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ और सीबीआई ने चौहान से पूछताछ तक करना मुनासिब नहीं समझा। अब तो कैग रिपोर्ट सरकार पर सवाल उठा रही है।

वहीं राज्य के मुख्यमंत्री चौहान व्यापम में हुई गड़बड़ियों को ज्यादा अहमियत नहीं देते हैं। वह लगातार यही कहते आए हैं कि व्यापम का घोटाला तो उनकी ही सरकार ने पकड़ा था। चौहान ने विधानसभा के बजट सत्र में माना था कि व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षाओं में गड़बड़ी के 1378 मामले ही सामने आए, जो कुल भर्तियों के मुकाबले एक प्रतिशत से भी कम है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष डॉ. हितेष वाजपेयी का कहना है कि कैग की रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है लिहाजा वह उसे खारिज करते हैं। अब समय आ गया है कि जब कैग की कार्यप्रणाली की पुनर्समीक्षा होना चाहिए, क्योंकि कैग के अनुमान कई बार गलत निकले हैं, जिससे वह हंसी का पात्र बनता है। व्यापमं के मामले में भी कुछ ऐसा ही है।

ज्ञात हो कि व्यापमं घोटाले के उजागर होने के बाद एसटीएफ और एसआईटी ने 55 मामले दर्ज किए थे, जिसमें 2500 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 21 सौ से ज्यादा को गिरफ्तार किया गया। वहीं चार सौ से ज्यादा अब भी फरार हैं।

इतना ही नहीं व्यापमं मामले से जुड़े 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस घोटाले में पकड़े गए पूर्व मंत्री से लेकर तमाम प्रभावशाली लोग इन दिनों जमानत पर जेल से बाहर हैं।
(संदीप पौराणिक)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button