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केंद्रीय विश्वविद्यालय और IIT में रॉक बैंड भरेंगे देशभक्ति के रंग

News Wing

New Delhi, 30August: देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालय और आईआईटी में जल्द ही रॉक बैंड के माध्यम से छात्र देशभक्ति के संगीत में झूमते हुए नजर आएंगे. 

आजादी के 70 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम 

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केंद्रीय मानव संसाधन ने आजादी के 70 साल और भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में इन सभी संस्थानों को ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराने के लिए कहा है.हालांकि विपक्ष के साथ-साथ सरकार की सहयोगी शिवसेना ने ही इस मसले पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं. ‘ये इंडिया का टाइम है’ और ‘इंडिया 2022’ की थीम के इर्द-गिर्द देश के विश्वविद्यालयों और आईआईटी के छात्र झूमते नजर आएंगे. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी संस्थानों को पत्र लिखकर ऐसा करने कोे लिए कहा है.

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ये है सरकार की प्लानिंग 

मंत्रालय के मुताबिक कुछ चुने हुए रॉक बैंड के सदस्य संस्थानों में अपनी संगीत की छठा भी बिखेरेंगे. सरकार का कहना है कि रॉक बैंक का चयन राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के जरिए केंद्र सरकार का सूचना प्रसारण मंत्रालय करेगा. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर का कहना है कि युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए रॉक बैंड को शामिल करने का फैसला लिया गया है. उनके द्वारा देशभक्ति के गाना गाने का कार्यक्रम वॉलंंटियरी है.

विपक्ष ने घेरा, कांग्रेस ने लगाए ये आरोप 

सरकार भले ही इसे छात्रों के बीच देशभक्ति की भावना जागृत करने का कार्यक्रम बता रही है. लेकिन विपक्ष के साथ-साथ सरकार की सहयोगी शिवसेना को ही ये रास नहीं आया है. कांग्रेस और शिवसेना ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के मुताबिक मानव संसाधन मंत्रालय ने एक निजी कंपनी को पैसे कमाने के लिए ये शिगूफा छोड़ा है.प्राइवेट बैंड भेजने से क्या देशभक्ति समझ में आएगी. कोई बैंड आकर छात्रों को देशभक्ति कैसे समझाएगा.

आरोप को बेबुनियाद बता रहा है मंत्रालय 

वहीं शिवसेना प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा कि देशभक्ति की भावना छात्रों में जगाना स्वागत योग्य है, लेकिन उसके लिए किसी कंपनी को कांट्रेक्ट देना कहां तक जायज है. हालांकि मानव संसाधन मंत्रालय इस आरोप को बेबुनियाद ठहरा रहा है. केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि विरोध वो कर रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक देश पर राज किया और 15 अगस्त, 26 जनवरी को केवल रस्म अदायगी में तब्दील कर दिया. सरकार पहले भी इस तरह के कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक विपक्षियों का विरोध झेल चुकी है. 15 अगस्त के मौके पर सरकार ने सभी राज्यों के स्कूलों में विशेष कार्यक्रम को लेकर सर्कुलर जारी किया था, जिसका ममता बनर्जी ने खुलकर विरोध किया था.

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