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केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें यथावत रखी, विकास दर पूर्वानुमान घटाया

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और यह 6.25 फीसदी पर बरकरार रहेगी। इसके साथ ही रिपरचेज रेट या अल्पकालिक ब्याज दरों में भी केंद्रीय बैंक ने कोई बदलाव नहीं किया है और यह 6.25 फीसदी ही रहेगी। वहीं, र्विस रेपो रेट की दर 5.75 फीसदी यथावत रहेगी।

सरकार ने मौद्रिक नीति की समीक्षा के लिए समिति का गठन किया है और उन्हें मुद्रास्फीति की दर को 4 फीसदी तक (2 फीसदी ज्यादा-कम) रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी दी गई है।

समिति ने एक बयान में कहा कि बुधवार को किया गया निर्णय मुद्रास्फीति की लक्ष्य प्राप्ति के लिए लिया गया है, जिसमें प्रमुख ब्याज दरों को यथावत रखा गया है।

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इस समिति में छह सदस्य हैं, जिसकी अध्यक्षता आरबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल कर रहे हैं। उन्होंने समिति के फैसले के पक्ष में मतदान किया। समिति की बैठक मिनट्स 21 दिसंबर को जारी किए जाएंगे।

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इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को देश के विकास दर अनुमान 7.6 फीसदी से घटाकर 7.1 फीसदी कर दिया।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने मौद्रिक नीति बयान में कहा, “2016-17 का जीवीए (सकल मूल्य संवर्धित) विकास के लिए हमारा दृष्टिकोण अनिश्चित है, क्योंकि दूसरी तिमाही में गति में 50 आधार अंकों की अप्रत्याशित गिरावट आई है, साथ ही नोटबंदी का प्रभाव अभी भी जारी है।”

केंद्रीय बैंक ने कहा कि निकट भविष्य में नकारात्मक जोखिम दो प्रमुख चैनलों से आएंगे। इसमें पहला नकदी आधारित क्षेत्र में नकदी की कमी के कारण आर्थिक गतिविधियों में गिरावट तथा धन की कमी से मांग में गिरावट शामिल होंगे।

बयान में कहा गया है, “पहले चैनल के असर से हालांकि तब निजात मिल जाएगी, जब बाजार में पर्याप्त मात्रा में नकदी आ जाएगी, साथ ही अर्थव्यवस्था में कैशलेस लेनदेन का अधिक से अधिक प्रयोग शुरू होगा।”

बयान में आगे कहा गया, “वहीं, दूसरे चैनल का असर सामान्यत: सीमित होगा। इसलिए दूसरी छमाही का अनुमान 7.7 फीसदी और पूरे वर्ष का अनुमान 7.6 फीसदी लगाया गया है।”

इसमें बताया गया, “तीसरी तिमाही में विकास दर में होने वाले नुकसान के साथ ही चौथी तिमाही में कृषि उत्पादन अधिक होने तथा उपभोग व सातवें वेतन आयोग लागू होने से मांग में इजाफे को देखते हुए 2016-17 की विकास दर के अनुमान को 7.6 फीसदी से घटाकर 7.1 फीसदी कर दिया गया है।”

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