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एनडीए की डिनर पार्टी से दूर रहे कुशवाहा, फूट से इनकार

Patna: करीब 8 सालों के बाद एनडीए के घटक दलों के नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एकदूसरे से मुलाकात की. और आपसी एकता का प्रदर्शन किया. पटना के ज्ञान भवन में आयोजित डिनर पार्टी में नीतीश कुमार समेत एनडीए के कई बड़े नेता शामिल हुए, लेकिन रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस भोज में नहीं पहुंचे. हालांकि इसके लिए पार्टी की ओर से दिल्ली में उनकी  व्यस्तता का हवाला दिया गया. वही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और राधा मोहन सिंह, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव तथा लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने बैठक में हिस्सा लिया और गठबंधन में किसी तरह की फूट से इनकार किया.

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एनडीए में बिखराव !

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भले ही बीजेपी और उसके दूसरे सहयोगियों द्वारा बिहार में एनडीए में किसी तरह के बिखराव से इनकार किया जा रहा है, लेकिन ये बात किसी से छुपी नहीं है कि लोकसभा सीट के बंटवारे को लेकर अंदर-ही-अदंर खींचतान जारी है. वही कुशवाहा ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय को टेलीफोन पर बताया कि वह बैठक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. इसके ठीक बाद राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि ने कहा कि अगर कुशवाहा को गठबंधन के नेता के तौर पर पेश कर चुनाव लड़ा जाए तो राजग को बिहार में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जबरदस्त सफलता मिलेगी.  नागमणि ने कहा कि भाजपा के बाद बिहार में राजग के घटक दलों में रालोसपा का समर्थन का आधार सबसे बड़ा है. राष्ट्रीय स्तर पर हमारी पार्टी जदयू से बड़ी है और 2014 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा के समर्थन से राजग को लाभ हुआ था. तब जद यू अकेले चुनाव लड़ी थी.नागमणि ने कहा, जदयू के कुछ नेता और भाजपा में भी नीतीश कुमार को बिहार में राजग का नेता माना गया है. इसे पूरे गठबंधन का दृष्टिकोण नहीं समझा जा सकता. बिहार के नेता का फैसला राजग के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा होगा ना कि राज्य स्तर पर. हालांकि, टकराव टालने के प्रयास के तहत नागमणि बाद में ज्ञान भवन परिसर में राजग की बैठक में आए. 

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गौरतलब है कि जेडीयू की ओर से कुछ दिन पहले ही ये बात कही गई थी कि पार्टी बिहार में 40 में से 25 सीटों पर चुनाव लड़ती आयी है, और इस बार भी लड़ेगी. अगर एनडीए को नीतीश कुमार की लोकप्रियता का फायदा लेना है, तो जेडीयू को सम्मान देना होगा. वही रालोसपा भी सम्मानजनक सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अड़ी है. ऐसे में आनेवाले दिनों में बिहार में सीटों का बंटवारा और एनडीए की एकता को बनाये रखना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती है.
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