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ऋण जारी न करना पड़ा भारी, बैंक देगा 50 हजार रुपये हर्जाना

नई दिल्ली | हरियाणा में एक ग्रामीण बैंक को एक साबुन निर्माता का ऋण लटकाए रखने के लिए दंडित किया गया है। सर्वोच्च उपभोक्ता अदालत ने सेवा में त्रुटि मानते हुए बैंक को 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के तौर पर साबुन निर्माता को देने का आदेश दिया है।

रेवाड़ी जिले के उद्यमी कुलदीप सिंह को एक लाख पचास हजार रुपये के ऋण का किश्त जारी नहीं करने के एवज में बैंक को क्षतिपूर्ति देना होगा।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग ने हाल ही में दिए गए अपने फैसले में कहा है कि प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अधिकारियों के इस प्रमाण के बावजूद कि आवेदक ने पूर्व ऋण किश्त का इस्तेमाल किया है, उसकी किश्त रोक ली गई।

गौरतलब है कि कुलदीप ने स्वीकृत ऋण की तीसरी किश्त जारी नहीं होने पर उपभोक्ता अदालत की शरण ली थी। राज्य उपभोक्ता आयोग ने कुलदीप के पक्ष में फैसला दिया जिसे बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग में चुनौती दी थी।

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राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग के पीठासीन सदस्य वी.बी. गुप्ता और सदस्य के.एस. चौधरी ने बैंक की अर्जी खारिज करते हुए 50,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया।

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गुप्ता ने कहा कि शिकायतकर्ता ने ऋण की पूर्व में जारी दो किश्तों का उपयोग किया और तीसरी किश्त बैंक ने रोक ली। यह सेवा में कमी है इसलिए याची बैंक की अर्जी खारिज की जाती है।

बैंक ने अपनी अर्जी में दावा किया था कि आवेदक ने पहली दो किश्तों का इस्तेमाल नहीं किया था और उसके अधिकारियों ने इसकी झूठी रिपोर्ट दी थी।

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