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आदिवासी व दलितों के विकास मद के 15,190 करोड़ का रघुवर सरकार ने बजट में किया बंदरबांट – एनसीडीएचआर

Palamu : रघुवर सरकार ने 23 जनवरी को झारखंड का बजट 2018-19 पेश किया. रघुवर  दास ने अपने बजटीय भाषण में कहा था कि पूरे राज्य के बजट का आकार 80 हजार करोड़ रुपये का है. उन्होंने बजट को लोगों के हित में बताते हुए कहा कि, इस बार कुल बजट का 52 प्रतिशत  आवंटन आदिवासियों के लिये किया गया है. जबकि सच्चाई इससे परे है. राज्य सरकार द्वारा पेश किये गये बजट के अध्ययन के बाद नेशनल कैम्पेन ऑन दलित  ‘मन राईटस (एनसीडीएचआर) की टीम ने पाया कि, सरकार के 32 विभागों में से कुछ को छोड़कर बाकि सभी विभागों में अनुसूचित जनजाति उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना के रुपये का दूसरे मद में प्रावधान किया गया है.

Palamu : रघुवर सरकार ने 23 जनवरी को झारखंड का बजट 2018-19 पेश किया. रघुवर  दास ने अपने बजटीय भाषण में कहा था कि पूरे राज्य के बजट का आकार 80 हजार करोड़ रुपये का है. उन्होंने बजट को लोगों के हित में बताते हुए कहा कि, इस बार कुल बजट का 52 प्रतिशत  आवंटन आदिवासियों के लिये किया गया है. जबकि सच्चाई इससे परे है. राज्य सरकार द्वारा पेश किये गये बजट के अध्ययन के बाद नेशनल कैम्पेन ऑन दलित  ‘मन राईटस (एनसीडीएचआर) की टीम ने पाया कि, सरकार के 32 विभागों में से कुछ को छोड़कर बाकि सभी विभागों में अनुसूचित जनजाति उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना के रुपये का दूसरे मद में प्रावधान किया गया है.

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15,190 करोड़ को सरकार ने अन्य विभागों में खर्च किये

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सरकार द्वारा लगभग 15,190 करोड़ का जो कि आदिवासी और दलित विकास के लिए है. उसे सरकार ने उन विभागों में आवंटित किया है, जिसका संबंध आदिवासी और दलित के विकास से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है. इन पैसों का विचलन ऐसी योजनाओं में किया गया है, जिसके बजट का आकार बहुत बड़ा है और ये सामान्य प्रकृति की योजनाएं जैसे- वृहत सड़कों का चैड़ीकरण, भवनों का निर्माण, बड़े बांधों के निर्माण, पूंजि परिसंपत्ति का निर्माण, झारखंड हेलीपैड एवं हवाई अड्डे का निर्माण, विभागों का कंम्पयूटरीकरण, ग्रेटर रांची डेवलप्मेंट ऐजेंसी, औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के साथ ही साथ डीभीसी और जरेडा को अनुदान दिया गया है.

 उक्त बातें एनसीडीएचआर के प्रदेश संयोजक सुनील मिंज व मिथिलेश कुमार ने दी. मौके पर झारखंड बजट वॉच के सेलेस्टीन कुजूर, कन्हायी सिंह, जेम्स हेरेंज ने भी झारखंड बजट के बारे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा कि आदिवासी व दलित समुदायों के साथ बजट आवंटन में भी भेदभाव किया जा रहा है. ऐसे में तो इनके जनसंख्या के अनुपात में बजट आवंटन किया जाना है, जो कभी नहीं किया गया, उपयोजना से जो बजट की राशि आवंटित भी की गयी, उसे भी ऐसे में विभागों में विचलन कर दिया गया, जिसका लाभ सिर्फ बड़ी कंपनियों, पूंजीपतियों और ठेकेदारों को मिलेगा. 

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रघुवर सरकार ने आदिवासी उपयोजना के लगभग 15,190 करोड़ रुपये इन विभागों में डाले 

कल्याण विभाग- 51 करोड़, जल संसाधन विभाग 717 करोड़, पेय जल एवं स्वच्छता विभाग 916 करोड़, नगर विकास एवं आवास विभाग-137 करोड़, परिवहन विभाग- 91 करोड़, पर्यटन कला एवं संस्कृति विभाग- 712, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा 490 करोड़, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग-138 करोड़, ग्रामीण विकास विभाग-3994 करोड़, पथ निर्माण विभाग 3294 करोड़, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग- 48 करोड़, योजना सह वित विभाग- 52 करोड़, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग- 32 करोड़, सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गार्वेनेंस- 10 करोड़, सूचना एवं जन संपर्क विभाग- 60 करोड़, उद्योग खान एवं भू-तत्व विभाग –192 करोड़, गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन- 36 करोड़, उच्च तकनीकि एवं कौशल विभाग-1123 करोड़, स्वास्थ्य शिक्षा चिकित्सा एवं परिवार कल्याण- 473 करोड़, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिर्तन –188 करोड़, खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले – 456 करोड़, उत्पाद एवं मद्य निषेध – 5 करोड़, उर्जा विभाग-595 करोड़, कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग –1745 करोड़, भवन निर्माण विभाग –635 करोड़. इस तरह से झारखंड सरकार के कई विभागों में आदिवासी उपयोजना के लगभग 15,190 करोड़ रुपये का विचलन किया गया है. 

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