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आजादी पर्व और व्‍यथा एक आम आदमी की..

 

एक बार फिर.. देश भर में तिरंगा फहराया जायेगा, अधिकतर उन्ही लोगों के द्वारा , जो इस देश, प्रजातंत्र या संबिधान से भी अपने को ऊपर समझते हैं.. प्रजा या जन को तो ये लोग कुछ समझते ही नहीं हैं.. पर मुखौटा देश प्रेम का पहन रखा है इसलिए झंडा तो यही फहराएंगे ..
देश के ७०-८०  करोड़ जनता के लिए तो इस त्यौहार का मायने कुछ भी नहीं है, क्योंकि उन्हें तो उस दिन के भोजन के लिए कुछ करना ही होगा ..
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हाँ कुछ नाबालिग बच्चों के लिए इस त्यौहार में कुछ आमदनी हो जाएगी, क्योंकि एक बहुत बड़े तबके को आज राष्ट्र-ध्वज की आवश्यकता होती है, जिसे वह अपने लम्बी, लम्बी गाड़ियों पर या मोटर साईकिल पर लगा कर शहर में घूम-घूम कर अपनी राष्ट्रवादिता से लोगों  को परिचित करा सकें..
The Royal’s
Pushpanjali
Sanjeevani
Pitambara
सभी ख़ास व्यक्तियों के बंगलों पर तो इस दिन यह ध्वज अवश्य फहराता है, क्योंकि अगर देश में ऐसी  आजादी नहीं आई होती तो उनके बंगले 'मेहनत' के कमाई से नहीं बन पाए होते..
यह कैसी आजादी है जहाँ प्रधान मंत्री अपने साथियों को घपले पर घपले करने देता है, और मुंह बंद रख कर अपने को ईमानदार कहलाता रहता है..?
यह कैसी आजादी है, जहाँ भ्रष्‍ट मुख्यमंत्री, तब तक पद नहीं छोड़ता, जब तक उसके चेले को मुख्यमंत्री नहीं बना दिया जाता ?
जहाँ कुछ मंत्री मिल कर पूरे देश की जनता के विचारों को सुनने को तैयार नहीं हैं? 
इस गरीब देश के सबसे ईमानदार  कहे जाने वाले गुजरात के मुख्य मंत्री की  सवारी बी एम डव्लू हो या औडी यह सोचा जा रहा है.
भ्रष्‍ट आईएएस के विरुद्ध कार्यवाई के लिए कई महीनो या सालों तक अनुमति की प्रार्थना कि जा रही है.
जहाँ ६ करोड़ लोगों  को दो समय का भोजन नसीब नहीं है वहां पर ९० लाख केन्द्रीय अधिकारियों के वेतन में एक बार में ही ( छठां वेतन कमीसन) २७०० करोड़ प्रति माह कि बढ़ोत्तरी की जाती है ….इसके साथ ही प्रदेशों के २ करोड़ कर्मचारियों के वेतन में ३०००० करोड़ प्रति माह  कि बढ़ोत्तरी हो जाती है….
विदेशों में जमा पैसा आये या ना आये …जो दीमक देश के  आजादी को ईन लोक सेवकों और जन प्रतिनिधियों के रूप में लग गयी है उसे मिटाने के लिए किस गाँधी को जन्म लेना होगा ?? अंग्रेजों अपने बनाये नियम खुद भी पालन करते थे और अपने देश और रानी के प्रति निष्ठां रखते थे, ये काले अंग्रेज तो केवल और केवल अपने लिए ही जीते हैं…और इनकी निष्ठां  भी केवल अपने तक ही है.. 
आजादी …कितना प्यारा शब्द है..पर यह इस देश में किसे है…. शायद ईन बाहुबलियों को ही आजादी है….संबिधान से आजादी, लूटने कि आजादी,अपने राजा बनाने कि आजादी, सबको गुलाम समझने कि आजादी, बोलने वाले के मुह को दबा देने कि आजादी..
चलो, एक बार फिर से इस साल भी झंडा फहराना देखें  …
– आर पी शाही

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