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आजादी के बाद फसल, बागवानी, दुग्ध सहित कई उत्पादनों में हुई बढ़ोतरी, झारखंड उत्पादकता के राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे

Ranchi : 22 जनवरी को रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों के सम्मलेन का आयोजन किया गया. साथ ही पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन संबंधी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के परिदृश्य में बदलाव विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार को संबोधित करते हुए विवि के कुलपति परविन्दर कौल ने कहा कि आजादी के बाद देश में फसल उत्पादन में चार गुणा, बागवानी और दुग्ध उत्पान में छह गुणा, मछली में नौ और अंडा उत्पादन में 27 गुणा की दर से बढ़ोतरी हुई है.

हालांकी झारखंड उत्पादकता के राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे है. सम्मलेन में देश के विभिन्न भागों में कार्यरत लगभग 200 पूर्ववर्ती छात्र भाग ले रहे हैं. इसमें क्षेत्रिय पशु चिकित्सा संस्थान जालंधर के पूर्व प्राचार्य डॉ. महेचंद्र के अलावा डॉ. सियाराम सिंह, डॉ. संत कुमार सिंह, डॉ. सीएसपी सिंह, जीएन शेख और डॉ. जावेद मंजूर भी शामिल थे. 

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देश में अंडा उपलब्धता के मामले में प्रति व्यक्ति 55 अंडे के मुकाबले झारखंड में केवल 13

कुलपति ने कहा कि प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति 55 अंडे का राष्ट्रीय औसत है. लेकिन  इसके मुकाबले झारखंड में केवल 13 अंडे की ही उपलब्धता हो पाती है. प्रतिदिन प्रति पशु उपलब्धता की वैश्विक औसत 25 ग्राम और राष्ट्रीय 15 ग्राम है. लेकिन   झारखंड में यह सिर्फ 5 ग्राम ही है. साथ ही उन्होंने कहा कि पशुपालन और पशुचिकित्सा के क्षेत्र में विकसित नई तकनीकों के माध्यम से इस अंतर को मिटाने की बड़ी चुनौती झारखंड में कार्यरत पशुचिकित्सा वैज्ञानिकों के समक्ष है.

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डेयरी और पशुपालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आ सकता है सुधार 
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ एस मंडल ने कहा कि सिंचाई सुविधा की कमी वाले झारखंड की, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार में डेयरी और पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. देश में प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन 302 ग्राम दुग्ध उपलब्धता के मुकाबले झारखंड में उपलब्धता मात्र 171 ग्राम है. जबकि लघु सीमांत किसान और कृषि श्रमिकों को लाभकारी रोजगार प्रदान करने एवं राज्‍य के लगभग 1.5 लाख महिला स्वसहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए नाबार्ड काम कर रहा है.

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शोधपत्र भी किया गया प्रस्तुत
रोग प्रबंधन एवं स्वास्थ्य में अभिनव प्रयोग विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र में डॉ बीके राय, डॉ बीके सिंह, डॉ एआर देब, डॉ केके सिंह, डॉ एमके गुप्ता, डॉ डीके ठाकुर और डॉ एमपी सिन्हा ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये. कार्यक्रम का संचालन डॉ अपर्णा पांडेय और धन्यवाद पूर्ववर्ती छात्र संघ के सचिव डॉ आलोक कुमार पांडेय ने किया. 

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