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अमेरिकी महिला मिशेल लायंस ने सैकड़ों लोगों की मौत देखी है

Texas  :  अमेरीकी महिला मिशेल लायंस एक ऐसी महिला हैं, जिन्होंने अपने सामने सैकडों लोगों को मौत की सजा पाते देखा है. वह अमेरिकी राज्य टेक्सस में आपराधिक न्याय विभाग की प्रवक्ता हैं. बता दें कि अन्य अमेरिकी राज्यों के मुकाबले टेक्सस में अधिक लोगों को मौत की सज़ा दी गयी है और उनमें से मिशेल लायंस सैकड़ों मौतों की गवाह रही हैं.  मिशेल ने 12 सालों तक मौतों का सिलसिला देखा है. बता दें कि पहले वे एक पत्रकार थीं.  बाद में वे टेक्सस के आपराधिक न्याय विभाग की प्रवक्ता के रूप में काम करने लगीं. यह नौकरी अजीब थी. इस नौकरी में मिशेल हर दिन मौत की सज़ा पाये लोगों को मरता हुआ देखती थीं. सन 2000 से 2012 के बीच मिशेल ने 300 लोगों को मरते हुए देखा.  पहली बार उन्होंने किसी को तब फांसी पर चढ़ते हुए देखा, जब वे 22 साल की थीं.  फांसी पाने वाले जेवियर क़्रुज़ को मरते हुए देखने के बाद मिशेल ने अपने अख़बार में लिखा, क्या मुझे उदास होना चाहिए था?  मिशेल कहती हैंफांसी की सज़ा देखना मेरी ड्यूटी थी. उन सभी यादों पर लिखी गयी उनकी किताब डेथ रोः द फ़ाइनल मिनट्टस हाल ही में प्रकाशित हुई है.

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1982 में चार्ली ब्रूक्स को ज़हरीले इंजेक्शन से मौत दी गयी

Sanjeevani

मिशेल ने  लिखा है कि वे मौत की सज़ा के पक्ष में थी. वह सोचती थी कि इस तरह की सज़ा कुछ अपराधों के लिए सही है. क्योंकि वे उस समय जवान थी और किसी से नहीं डरती थी. वह हर स्थिति को ब्लैक एंड व्हाइट की तरह देखती थी.  लिखा कि साल 1924 से टेक्सस प्रांत में मौत की हर सज़ा एक छोटे से शहर हंट्सविल में दी जा रही है. यहां सात जेलें हैं, जिसमें से एक वॉल्स यूनिट भी है, एक विशाल विक्टोरियन इमारत,  जहां मौत की सज़ा दी जाती है. साल 1972 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा पर यह कह कर रोक लगा दी थी कि यह एक क्रूर तरीका है. लेकिन कुछ महीनों के भीतर ही कई राज्यों ने इसे दोबारा बहाल करने की मांग की. टेक्सस में करीब दो साल बाद मौत की सज़ा बहाल कर दी गयी,  लेकिन मौत देने का तरीका बदल गया. टेक्सस में जानलेवा सुई का इस्तेमाल किया जाने लगा. 1982 में चार्ली ब्रूक्स को ज़हरीले इंजेक्शन से मौत दी गयी.  मिशेल ने एक रिपोर्टर के रूप में लगभग 38 मौतें देखी. वे  कहती हैं, अब जब भी मैं अपने लेखों को देखती हूं, वे मुझे परेशान करते हैं.  

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किसी की ज़िंदगी के अंतिम पलों को देखना  सामान्य बात नहीं हो सकती  

किसी की ज़िंदगी के अंतिम पलों को देखना और देखना कि कैसे उसकी आत्मा उसके शरीर को छोड़कर जाती है,  कभी भी सामान्य बात नहीं हो सकती है. मौत की सज़ा पाने वाले को एक इलेक्ट्रिक चेयर पर लिटा दिया जाता था और उन्हें सुई देकर हमेशा के लिए सुला दिया जाता था.  जब भी क़ैदियों को सुई दी जाती थी, उनके फेफड़े काम करना बंद कर देते थे और वो क़ैदियों को मरते हुए उनकी अंतिम सांस, खांसी या हल्की आवाज़ सुनती थीं. मिशेल को दुनियाभर से पत्र और ईमेल मिलते थे, जिसमें सज़ा को राज्य सरकार की प्रायोजित हत्या बताया जाता था और उसमें उन्हें हिस्सेदार भी कहा जाता था. मिशेल ने सात सालों तक वहां किया, फिर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. उस दिन उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि एक लंबी सज़ा काटने के बाद रिहा हुई हैं. 

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