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अमेरिकी नेशनल बुक अवार्ड से चूकीं झुम्पा

वाशिंगटन: पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय मूल की अमेरिकी लेखिका झुम्पा लाहिड़ी का नया उपन्यास ‘द लोलैंड’ काल्पनिक कथा श्रेणी में 2013 अमेरिकी ‘नेशनल बुक अवार्ड’ जीतने से चूक गया। यह पुरस्कार लेखक जेम्स मैकब्राइड की कृति ‘द गुड लॉर्ड बर्ड’ ने जीत लिया है।

मैकब्राइड की रचना ‘द गुड लॉर्ड बर्ड’ 1850 दशक के एक युवा दास की यात्रा की कहानी है। जबकि लाहिड़ी का उपन्यास 1960 के दशक के कोलकाता निवासी दो भाइयों की कहानी है।

कल्पित कथा श्रेणी के अंतिम दौर में जगह बनाने वालों में रशेल कुशनर की ‘द फ्लैमथ्रोवर्स’, थॉमस यनछोन की ‘ब्लीडिंग ऐज’ और जॉर्ज सॉडंर्स की ‘टेंथ ऑफ दिसेंबर’ शामिल थीं।

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बुधवार को न्यूयॉर्क में हुए पुरस्कार वितरण समारोह में निर्णायक मंडल ने मैकब्राइड की कृति की तारीफ करते हुए कहा, “यह कृति कॉमिक जैसी ध्वनि रखती है और अब तक मार्क ट्वेन की सुनी कृतियों जैसी ही वास्तविक है।”

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पुरस्कार जीतने के बाद 56 वर्षीय मैकब्राइड ने कहा कि वह पुरस्कार जीतने के बाद किए जाने वाले संबोधन के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे, क्योंकि उन्हें यनछोन, लाहिड़ी और सॉडंर्स के आगे अपने जीतने की कतई उम्मीद नहीं थी।

उन्होंने कहा, “वे लाजवाब लेखक हैं। लेकिन यकीनन यहां रहना अच्छा है।”

यह वार्षिक पुरस्कार नेशनल बुक फाउंडेशन द्वारा उन अमेरिकी लेखकों को दिया जाता है जिन्होंने काल्पनिक कथा, कथेतर साहित्य, गद्य और युवा साहित्य के लिए काम किया हो।

वहीं, कथेतर साहित्य पुरस्कार ‘द अनवाइंडिंग : ऐन इनर हिस्ट्री ऑफ द न्यू अमेरिका’ के लिए जॉर्ज पेकर ने जीता। गद्य पुरस्कार ‘इंकार्नडिन’ के लिए मैरी जिबिस्ट को मिला। इसके अलावा युवा साहित्य पुरस्कार सिंथिया कादोहता को उनकी रचना ‘द थिंग अबाउट लक’ के लिए दिया गया।

लाहिड़ी (46 वर्ष) पिछले माह समकालीन कथा श्रेणी के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘मैन बुकर प्राइज’ में कॉमनवेल्थ और आयरलैंड से पिछड़ गई थीं। -अरुण कुमार

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